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Saturday, February 25, 2017

मोदी ने भगवान शिव के परिवार का उदाहरण देकर एकता का ऐसा पाठ पढ़ाया, तड़ातड़ बजी तालियाँ: पढ़ें

मोदी ने भगवान शिव के परिवार का उदाहरण देकर एकता का ऐसा पाठ पढ़ाया, तड़ातड़ बजी तालियाँ: पढ़ें

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कोयम्बटूर: प्रधानमंत्री मोदी रैलियों में अपने भाषण से लोगों को तालियाँ बजाने के लिए मजबूर तो कर ही देते हैं लेकिन ज्ञान और समागम समारोहों में भी मोदी अपनी बातों से लोगों का मन मोह लेते हैं और उन्हें तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर देते हैं, कल उन्होंने तमिलनाडु के कोयम्बतूर में आदियोगी द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि के कार्यक्रम में भगवान शिव की 112 फीट प्रतिमा का अनावरण करके ऐसा भाषण दिया कि लोग तालियाँ बजाने के लिए मजबूर हो गए और मोदी का लोहा मान गए। स्वयं सद्गुरु जेवी ने मोदी को एक योगी बताया। 

मोदी ने भगवान शिव के परिवार का उदाहरण देकर भारत को एकता का पाठ पढाया। उन्होंने कहा कि भारत में वाराणसी से लेकर केदारनाथ तक और गुजरात के सोमनाथ से लेकर कन्याकुमारी तक शिव ही शिव हैं, हर जगह शिव हैं जो हम भारतीयों को एक करके रखते हैं और मेरी किस्मत ऐसी है कि मैं गुजरात में यानी सोमनाथ की धरती पर जन्मा और संसद बनकर विश्वनाथ की धरती यानी काशी पहुँच गया। 

मोदी ने भगवान शिव का बखान करते हुए कहा, देव तो कई हैं लेकिन महादेव सिर्फ एक हैं और मंत्र तो कई हैं लेकिन शिव से जुड़ा महामृत्युंजय मंत्र सिर्फ एक है। 

उन्होंने कहा भारत एक विविधता वाला देश है उसके बाद भी हम एक होकर रहते हैं और ये हमने भगवान शिव से सीखा है क्योंकि भगवान शिव के गले में सर्प रहता है और उनके पुत्र गणेश मूस की सवारी करते हैं, इसके अलवा उनके दूसरे बेटे कार्तिक भी मोर की सवारी करते हैं। सर्प और मूस एक दूसरे के दुश्मन हैं क्योंकि सर्प मूस को खा जाता है वहीँ मोर और सर्प भी एक दूसरे के दुश्मन हैं क्योंकि मोर सर्प को खा जाता है, ये सब एक दूसरे के दुश्मन हैं लेकिन एक साथ रहते हैं, इसी तरह हमरे देश में कई राज्य हैं, बोली और भाषा अलग अलग है लेकिन हम अपनी विविधता का सम्मान करते हुए एक साथ रहते हैं।

मोदी ने कहा कि भारत देवों की धरती है, हम भले ही अलग अलग राज्यों में रहते हैं और अलग अलग भाषा बोलते हैं लेकिन जब हम भगवान शिव का ध्यान करते हैं तो हमारे मन में विशाल हिमालय के कैलाश का दृश्य सामने आता है वही पार्वती जी के स्मरण से महासागरों से घिरे कन्याकुमारी की कल्पना सामने आती है और दोनों को एक साथ देखने से प्रकृति की अनुभूति होती है, इसके अलावा हमें यह भी अहसास होता है कि कन्याकुमारी से लेकर हिमालय तक भारत एक है। 

मोदी ने कहा - इसके अलावा जब हम देवी देवताओं का स्मरण करते हैं तो किसी न किसी पशु,पक्षी या वृक्ष का ख्याल आता है, यह प्रकृति के साथ हमारे दृटिकोण को दर्शाता है। 

मोदी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में नारी को श्रेष्ठतम स्थान प्राप्त है, शास्त्र कहते है नारी तू नारायणी यानी नारी तो स्वयं नारायणी है, महिलाओं के लिए कोई शर्त नहीं है लेकिन  पुरुषों के लिए दिव्यता प्राप्त करने या नारायण बनने के लिए परिश्रम करने की शर्त है। 

मोदी ने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रन्थ, हमारे शास्त्र हमें और हमारी आने वाली पीढ़ियों को अथाह ज्ञान प्रदान कर सकते हैं लेकिन कुछ लोग प्राचीन शब्द जुड़ा होने के कारण उस ज्ञान को ठुकरा देते हैं या उसे ग्रहण करने में अपनी तौहीन समझते हैं जो मानवता के लिए सही नहीं है। 

मोदी ने यह बातें इस तरह से और इतने विश्वास के साथ बतायीं कि लोग तालियाँ बजाने के लिए मजबूर हो गए और लोगों में जोश आ गया। मोदी ने एक बार फिर से अपने ज्ञान की प्रतिभा का परिचय करा दिया। देखें VIDEO.