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Thursday, February 16, 2017

शिवराज सिंह ने बीजेपी विधायकों को ज्ञान और तर्कशक्ति बढाने की सलाह दी, पढ़ते रहो, सीखते रहो

शिवराज सिंह ने बीजेपी विधायकों को ज्ञान और तर्कशक्ति बढाने की सलाह दी, पढ़ते रहो, सीखते रहो

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पचमढ़ी, 15 फरवरी: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पार्टी के विधायकों को अपना ज्ञान बढ़ाने की सलाह देते हुए कहा कि ज्यादा अध्ययन करने से वे ज्यादा तार्किक तरीके से और तथ्यों के साथ अपनी बात लोगों के सामन रख पाएंगे, जिससे उनकी और पार्टी की छवि निखरेगी। मध्यप्रदेश की पर्यटन नगरी पचमढ़ी में बुधवार को दो दिवसीय विधायक प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र में चौहान ने कहा कि, "विधायकों केा अध्ययन बढ़ाकर तथ्यों और तकरे के साथ अपनी बात रखने का सामथ्र्य और बढ़ाना चाहिए, जिससे हम कहीं भी अपनी बात लेकर जाएंगे तो उसे न मानने का कोई कारण किसी के पास नहीं रहेगा। ऐसा करने से समाज में हमारी छवि निखरेगी और जब हमारी छवि निखरेगी तब निश्चित ही भारतीय जनता पार्टी की छवि भी और निखरेगी।"

चौहान ने अपने विधायकों से कहा है, "वे समय का बेहतरीन इस्तेमाल करने के लिए योजना बनाए और जनता के हित के कामों को अधिक से अधिक समय देकर करने का प्रयत्न करें।"

उन्होंने कहा कि सरकार दिन रात मध्यप्रदेश की जनता की सेवा में नई-नई योजनाएं और प्रकल्प लेकर आ रही हैं। विकास के काम दस गुना रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं। इन सभी कार्यो का भूमिपूजन और लोकार्पण उस क्षेत्र के समूचे समाज को साथ लेकर करना चाहिए। 

चौहान ने बताया कि एक मई को आदि गुरु शंकराचार्य की जंयती है। इसे हर जिला स्तर और ग्राम स्तर पर मनाने की योजना है। ओंकारेश्वर में शंकराचार्य की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित की जाना चाहिए, इसके लिए घर घर से धातु मांगी जाएगी। 

समापन सत्र के मंच पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण जटिया और प्रदेश महामंत्री अजयप्रताप सिंह उपस्थित थे।

Saturday, February 11, 2017

महात्मा गाँधी पहले सेवा को बोझ समझते थे, एक 10 वर्ष की बालिका ने उनकी अंतरात्मा को जगाया: भागवत

महात्मा गाँधी पहले सेवा को बोझ समझते थे, एक 10 वर्ष की बालिका ने उनकी अंतरात्मा को जगाया: भागवत

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भोपाल, 10 फरवरी: केंद्र और मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मार्गदर्शक संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक दृष्टांत के जरिए बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 'सेवा' को बोझ समझते थे, उन्हें 10 साल की एक बच्ची ने बताया था कि सच्ची सेवा क्या है। साथ ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की कार्यशैली की सराहना करते हुए उसकी कोशिशों की तुलना संत रविदास (रैदास) के काल से की। संघ प्रमुख ने कहा कि संत रविदास के काल में पसीने के फूल खिलते थे, जिनकी सुगंध अलग ही होती थी, अब एक बार फिर पसीने के फूल खिलाने की बात हो रही है, इसलिए अब देश फिर से बड़ा होगा। 

संत रविदास जयंती के मौके पर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लाल परेड मैदान में शुक्रवार को संघ से संबद्ध सेवा भारती के रजत जयंती वर्ष पर आयोजित श्रम साधक संगम (सम्मेलन) में भागवत ने सेवा को परिभाषित करते हुए कहा कि सेवा अपनेपन के भाव के चलते हो जाती है। यह करनी नहीं पड़ती, बल्कि अपने आप हो जाती है, सेवा बोझ नहीं होती। 

उन्होंने एक दृष्टांत देते हुए कहा, "पुणे में एक बार महात्मा गांधी पहाड़ी से उतर रहे थे, तो उन्होंने 10 साल की एक बालिका को पांच साल के भाई को कंधे पर बैठाए देखा तो कहा कि उसे कंधे से उतारो, वह चल सकता है, बोझ क्यों ढो रही हो। तब उस बालिका ने गांधी से कहा था कि क्या बात कर रहे हैं आप, अपना भाई बोझ होता है क्या?"

याद रहे कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आरएसएस को महात्मा गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। इस कारण पुणे में उन पर मानहानि का मुकदमा चल रहा है। गांधी का हत्यारा नाथूराम गोडसे गांधी की हत्या से पहले आरएसएस से निकल चुका था। राहुल का कहना है वह कि आरएसएस की हिंदूवादी विचारधारा को गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार मानते हैं। गोडसे भले ही आरएसएस छोड़ चुका था, लेकिन उसकी विचारधारा वही थी। गांधी की हत्या के समय वह अखिल भारतीय हिंदू महासभा का सदस्य था।

संघ प्रमुख भागवत ने श्रम साधकों को समझाया कि अपनों की सेवा कोई बोझ नहीं होती। उन्होंने कहा कि कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता, जिस देश में श्रम का सम्मान होता है, वही देश प्रगति करता है, संत रविदास जी का भी संदेश है कि अपने श्रम को कम मानो, क्योंकि समाज को उसकी जरूरत है। 

भागवत ने कहा , "रैदास की कीर्ति जब हर तरफ फैलने लगी तो लोग उनके पास जाने लगे, उनके पास तक जाने वाले रास्तों में लोगों को फूलों की नई तरह की खुशबू आई, जिस पर लोगों ने फूलों के बारे में पूछा तो रैदास ने पसीने के फूलों की खुशबू और उन फूलों को श्रम से गिरे पसीने के फूल बताया, पसीने के फूल खिलना बंद हो गया, तो देश अधोगति में चला गया। अब पसीने के फूल फिर से खिलाने की बात हो रही है, इसलिए देश बड़ा होगा।"

सेवा भारती के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "हिंदू समाज कुटुंब के समान है, इस कुटुंब में एक को मिले और बाकी को नहीं मिले, यह नहीं चलेगा। जिनको मिला है वह दूसरों को देने की कोशिश करें, यह बोझ नहीं है, यह सेवा की बात है।"

इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रम साधकों के लिए भूखंड और उस पर आवास बनाने के लिए जल्द कानून लाने का वादा किया। साथ ही सरकार की योजनाओं को भी गिनाया। 

भागवत राज्य के आठ दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने मंगलवार को भोपाल में संघ के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी, बुधवार को बैतूल में हिंदू सम्मेलन और गुरुवार को होशंगाबाद के बनखेड़ी में भाउ साहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास के रजत जयंती समारोह में हिस्सा लिया था। 

उन्होंने चौथे दिन शुक्रवार को रायपुर में श्रम साधक सम्मेलन में हिस्सा लिया। भागवत के प्रवास और लाल परेड मैदान में कार्यक्रम के आयोजन के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। भाजपा के मार्गदर्शक की सुरक्षा के लिए राजधानी के कई मार्गो पर यातायात बंद कर दिया गया और कुछ मार्गो पर वाहनों को दूसरे रास्तों से ले जाने का निर्देश दिया गया।

Thursday, January 26, 2017

मध्य प्रदेश को कूड़ामुक्त करने के लिए 1 मई से पोलीथीन को बैन कर देंगे शिवराज सिंह

मध्य प्रदेश को कूड़ामुक्त करने के लिए 1 मई से पोलीथीन को बैन कर देंगे शिवराज सिंह

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भोपाल, 26 जनवरी: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 68वें गणतंत्र दिवस समारोह में एक मई से राज्य में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। राजधानी के लाल परेड मैदान में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वच्छता और कैशलेस अभियान में सहयोग करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, "प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। राज्य सरकार ने 31 मार्च तक प्रदेश को खुले में शौच से मुक्त करने का संकल्प लिया है। स्वच्छता अभियान में सबसे बड़ी बाधा पॉलीथिन है, इसलिए एक मई से राज्य में पॉलीथिन को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।"

उल्लेखनीय है कि राज्य के राज्यपाल का प्रभार गुजरात के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली के पास है। लिहाजा राजधानी में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण मुख्यमंत्री चौहान ने किया। 

चौहान ने कहा, "पॉलीथिन पर्यावरण के लिए भी घातक है, इसलिए पॉलीथिन के स्थान पर कागज और कपड़े की थैलियों के इस्तेमाल किया जाए। प्रतिबंध के बाद जो व्यक्ति पॉलीथिन का उपयोग करेंगे। उन पर कार्रवाई की जाएगी।"

उन्होंने कहा कि राज्य में स्वच्छता अभियान को लेकर सभी में होड़ मची हुई है। भोपाल से लेकर छोटे शहरों में अपने नगर को सर्वश्रेष्ठ बनाने की होड़ मची हुई है। 

उन्होंने केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए जनता से मिले साथ पर आभार जताया। 

उन्होंने कहा कि इस फैसले से कालाधन, आतंकवाद पर रोक लगेगी। राज्य में कैशलेस लेने-देन को बढ़ावा देने के लिए 'कैशलेस ट्रांजेक्शन मिशन' बनाया जाएगा।

राज्य में 68वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। जगह-जगह ध्वजारोहण के साथ प्रभातफेरियां निकाली गईं और रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए गए। राजधानी के लालपरेड मैदान में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली।

प्रदेश में गणतंत्र दिवस के तहत रंगारंग कार्यक्रमों का दौर जारी हैं। तमाम सरकारी, सार्वजनिक व निजी संस्थाओं में तिरंगा फहराया गया और मिठाइयां बांटी गईं।

Friday, January 13, 2017

कटनी में एसपी गौरव तिवारी के तबादले के बाद शिवराज सरकार का विरोध जारी, कर्मचारी करेंगे हड़ताल

कटनी में एसपी गौरव तिवारी के तबादले के बाद शिवराज सरकार का विरोध जारी, कर्मचारी करेंगे हड़ताल

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कटनी, 13 जनवरी: मध्यप्रदेश के कटनी जिले में हवाला कारोबार का खुलासा करने वाले पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी के तबादले से उपजा जनाक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। चौथे दिन भी लोग सड़कों पर उतरे, महिलाओं ने चूड़ियां लहराईं, आंदोलन में आम आदमी पार्टी (आप) का साथ मिला तो उधर भोपाल में तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने तीन फरवरी से बेमियादी हड़ताल का ऐलान किया। इस बीच कटनी के नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ला ने कार्यभार संभाल लिया। 

गौरव तिवारी 500 करोड़ रुपये के हवाला कारोबार का खुलासा करने के कारण चर्चा में थे और कई रसूखदारों के नाम हवाला कारोबार में सामने आने लगे थे। मामले की जांच में जुटे एसपी का सोमवार को तबादला कर दिया गया। तिवारी यहां महज छह माह ही तैनात रहे। माना जा रहा है कि उनका तबादला राजनीतिक दबाव में, एक मंत्री को बचाने के लिए किया गया है। जांच पूरी होने से पहले ही अधिकारी का तबादला कर दिए जाने के बाद मंगलवार से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन जारी है। एक दिन बाजार भी बंद रखा गया।

शुक्रवार को सैकड़ों लोग कांग्रेस विधायक सौरभ सिंह, पूर्व विधायक सरोज बच्चन नायक के नेतृत्व में प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे। महिलाएं हाथ में चूड़ियां लिए हुए थीं और ये चूड़ियां शिवराज सरकार को सौंपने के नारे लगा रही थीं। इन सभी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और कुछ देर बाद रिहा कर दिया।

प्रदर्शन के दौरान सरोज बच्चन कहा, "महिलाओं को सरकार सुरक्षा दे नहीं पा रही है। एक अधिकारी ऐसा आया, जिसने महिलाओं की सुरक्षा के लिए काम किया तो उसे स्थानांतरित कर दिया गया। सरकार को अपना फैसला बदलकर तिवारी को फिर से कटनी में पदस्थ करना चाहिए।"

कांग्रेस विधायक सौरभ सिंह ने सरकार पर एक मंत्री को बचाने के लिए पुलिस अधीक्षक को हटाने का आरोप लगाया।

वहीं कटनी पहुंचकर नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ल ने शुक्रवार को पदभार संभाला। शुक्ल ने आईएएनएस को बताया कि शुक्रवार को कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, बल्कि सड़क पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को सिर्फ रोका गया था।"

दूसरी ओर, भोपाल में तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने दो फरवरी तक तिवारी का तबादला निरस्त कर उनकी वापसी न होने पर तीन फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया।

मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने आईएएनएस से कहा, "कटनी के पुलिस अधीक्षक तिवारी एक ईमानदार अफसर हैं। वह हवाला कारोबार की जांच कर रहे थे, इसमें कई बड़े लोगों के नाम भी सामने आ रहे थे। रसूख वाले लोग बेनकाब न हो जाएं, इसलिए उनका तबादला कर दिया गया। अगर दो फरवरी तक तबादला निरस्त नहीं किया गया तो हमारे संगठन के पांच लाख कर्मचारी तीन फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।"

द्विवेदी ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी कर कालाधन बाहर लाने की मुहिम चलाई है, तो दूसरी ओर काले कारोबारियों ने हवाला का रास्ता अपना लिया और जब पुलिस ने इसका खुलासा किया तो अफसर का ही तबादला कर दिया गया। इससे प्रदेश सरकार की नीयत का पता चलता है।

राजधानी में शुक्रवार को तिवारी के तबादले के विरोध में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। आप का आरोप है कि कटनी के हवाला कारोबार में एक मंत्री का नाम आ रहा था, इसीलिए तिवारी का तबादला कर जांच को भटकाने की कोशिश की गई है। आप ने तिवारी का तबादला निरस्त करने की मांग की है। 

लोगों में आक्रोश बढ़ता देख मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कटनी हवाला मामले की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से आग्रह करने की बात कही है। वहीं कांग्रेस ने सीधे तौर पर इस मामले को दबाए जाने का आरोप लगाया है।
हवाला कारोबारी का पर्दाफाश करने वाले पुलिस अफसर का ट्रान्सफर करके शिवराज ने मोल ले ली मुसीबत

हवाला कारोबारी का पर्दाफाश करने वाले पुलिस अफसर का ट्रान्सफर करके शिवराज ने मोल ले ली मुसीबत

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भोपाल, 12 जनवरी: मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार अपने को जनता का हमदर्द बताते का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देती। मगर यह भी उतना ही सच है कि उसे जनहितैषी अफसर रास नहीं आते हैं, तभी तो ऐसे अफसरों पर सरकार की गाज गिरती है और नाइंसाफी के खिलाफ लोगों को बार-बार सड़कों पर उतरना पड़ता है। शिवराज सिंह पिछले 12 वर्षों से मध्य प्रदेश को विकास के रास्ते पर दावा कर रहे हैं लेकिन ईमानदार और जनता के लिए काम करने वाले अफसरों का ट्रान्सफर करके अपना दामन पर दाग भी लगा रहे हैं। 

ताजा मामला कटनी के पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी के तबादले का है। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने 500 करोड़ रुपये के हवाला कारोबार का खुलासा किया और उसकी आंच सत्ता से जुड़े एक व्यक्ति पर आने लगी थी। सरकार ने आनन-फानन में तिवारी का तबादला कटनी से छिंदवाड़ा कर दिया। 

तिवारी के तबादले से कटनी की जनता भड़क उठी। लोग सड़कों पर उतर आए, रैलियां निकलीं, बाजार बंद रहे और सरकार पर भी जमकर हमला बोले। हर जुबां से सिर्फ एक ही आवाज निकली और सरकार से पूछा कि 'जो पुलिस अफसर समाज के लिए काम कर रहा था, जिसकी तैनाती के बाद से अपराधियों पर अंकुश लगा था, महिलाएं व युवतियां सुरक्षित महसूस करती थीं, उसका महज छह माह के भीतर ही तबादला क्यों किया गया?' 

राज्य की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच कहती हैं, "सरकार को इतनी जल्दी तबादला नहीं करना चाहिए, यह बात सही है कि कई बार प्रशासन को दबाव में काम करना होता है, हो सकता है कि वह अफसर किसी के लिए रोड़ा बन रहा हो और दबाव के चलते सरकार को उसका तबादला करना पड़ा हो, मगर तिवारी के तबादले से संदेश तो यही जा रहा है कि सरकार की नीयत सही नहीं है।"

राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने कटनी पुलिस अधीक्षक तिवारी के तबादले को 'सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया' करार दिया है। इस पर पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विजय वाते कहते हैं, "तबादलों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश है कि दो साल से पहले तबादले न किए जाएं और किए जाएं तो कारण बताया जाए। तिवारी के तबादला आदेश के साथ कारण भी बताया जाना चाहिए। अगर इसी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर छह-छह माह में तबादले होते रहे तो प्रशासन व शासन का तो भगवान ही मालिक है।"

तिवारी इकलौते ऐसे अधिकारी नहीं हैं, जो नियम-सम्मत काम कर रहे थे, और उससे कुछ लोग प्रभावित हुए तो उनका तबादला किया गया। इससे पहले बीते साल शाजापुर के तत्कालीन जिलाधिकारी राजीव शर्मा को सिर्फ इसलिए हटाया गया, क्योंकि उन्होंने जनहित की कई योजनाएं शुरू कर दी थीं, जिसके चलते क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर लगने वाली भीड़ कम हो गई थी।

शर्मा ने शाजापुर में रहते हुए शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए खास कदम उठाए। इतना ही नहीं, आमजन को होने वाली समस्या को फेसबुक में दर्ज कराने का अभियान चलाया, जिसमें यह व्यवस्था थी कि शिकायत आते ही उस पर बगैर समय गंवाए निराकरण के प्रयास किए जाएं। इसका नतीजा यह हुआ कि लोग जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाने की बजाय फेसबुक से शिकायत दर्ज कराने लगे। इससे जहां समस्या का जल्द से जल्द निराकरण हुआ, वहीं भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा। 

प्रशासन की जनता को बेहतर सुविधा देने की पहल से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को लगा कि उनकी अहमियत घटने लगी है, क्योंकि जिस काम के लिए आमजन को उनके दरबार में आना चाहिए, उसके लिए वे फेसबुक का सहारा ले रहे हैं। बदलते हालात से परेशान नेताओं ने सरकार पर दबाव बनाकर शर्मा का तबादला करा दिया। शर्मा के तबादले के विरोध में जनता भी सड़कों पर उतरी, कई दिन प्रदर्शन चले।

इसी तरह नरसिंहपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी सी.बी. चक्रवर्ती का तबादला भी इसलिए किया गया, क्योंकि वे जनता के हिमायती बन गए थे। उनके तबादले के विरोध में भी सड़कों पर लेाग उतरे थे। नीमच में जिलाधिकारी रहे नंद कुमारम् का भी तबादला इसलिए किया गया, क्योंकि उन्होंने अंतर्राज्यीय बैरियर पर अवैध परिवहन पर रोक लगा दी थी। 

इन चार अफसरों के तबादलों ने सरकार की छवि पर आंच आई है। लोगों में संदेश यही गया है कि 'सरकार को नियम और कानून के मुताबिक जनता के लिए काम करने वाले अफसर पसंद नहीं है।'

इतना ही नहीं, जनता ने सड़कों पर उतरकर तबादलों का विरोध किया और सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। अब देखना है कि सुशासन का दावा करने वाली सरकार जनता के बीच जा रहे नकारात्मक संदेश से अपनी 'फेस सेविंग' कैसे करती है।