Nov 24, 2017

अब सामने आयी मेदांता अस्पताल की लूट, डेंगू में गरीब से 16 लाख लूट लिया, बच्चा भी हाथ से गया


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जितने बड़े अस्पताल उतनी ही बड़ी लूट, गरीबों के पास इन लुटेरे अस्पतालों में जाने के अलावा कोई चारा ही नहीं है क्योंकि सरकारों ने सरकारी अस्पतालों को नरक बना रखा है, इनमें ना तो सुविधाएं हैं और ना ही सरकारी डॉक्टर और मरीजों से नरमी से पेश आते हैं, घमंड में चूर रहते हैं, मरीजों को कीड़े मकोड़े समझकर उनके साथ अकड से पेश आते हैं, अपने मासूमों को बचाने के लिए गरीबों को भी घर बार बेचकर प्राइवेट अस्पतालों में जाना ही पड़ता है लेकिन वहां पर उन्हें लूट लिया जाता है.

हरियाणा में प्राइवेट अस्पतालों में जबरदस्त लूट चल रही है, हाल ही में गुरुग्राम में फोर्टिस अस्पताल की लूट का मामला आया था जिसमें डेंगू के इलाज में सिर्फ 15 दिन में 16 लाख रुपये लूट लिए गए थे और बच्ची की जान भी चली गयी थी.

अब ऐसी ही लूट का मामला गुरुग्राम के ही मेदान्ता अस्पताल में सामने आया है, वहां पर भी 22 दिनों में एक गरीब बच्चे के इलाज में 16 लाख रुपये लूट लिए गए हैं, गरीब आदमी गोपेन्द्र सिंह ने घर बेचकर किसी तरह अस्पताल का बिल चुकाया लेकिन जब पैसे ख़त्म हो गए तो बच्चे को वहां से निकालकर दिल्ली के ही सरकार अस्पताल RML में भर्ती कराया गया लेकिन दो दिन में ही बच्चे की मौत हो गयी क्योंकि RML में वह सुविधाएं नहीं थीं जो मेदांता अस्पताल में थीं लेकिन वहां पर बच्चे की जान नहीं बच सकी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 7 साल के शौर्य प्रताप डेंगू से पीड़ित थे, उनके पिता गोपेन्द्र सिंह बीमा एजेंट हैं, वह महीनें में सिर्फ 7 से 8 हजार रुपये कमाते हैं, उन्होंने मेदांता अस्पताल का बिल चुकाने के लिए अपना मकान गिरवी रख कर कर्ज लिया था लेकिन फिर भी पैसे कम पड़ गए और 16 लाख चुकाने के बाद भी उन्हें बच्चे को सरकारी अस्पताल में ले जाना पड़ा जहाँ पर बच्चे की मौत हो गयी.

इस बच्चे को ग्वालियर से गुरुग्राम लाया गया था, अस्पताल ने करीब 22 दिन तक इस बच्चे का इलाज किया, इस दौरान मेदांता अस्पताल ने कुल मिलाकर 15 लाख 88 हजार रुपये का बिल बना दिया. इस बिल में 20 हजार रुपये का डिस्काउंट भी दिया गया जिसके बाद यह बिल 15 लाख 68 हजार हो गया.

इस बिल में 7.24 लाख रुपये सिर्फ दवाओं के लगाए गया मतलब रोजाना 32 हजार रुपये की दवाई ही खिला दी गयी. 22 दिन का ICU कमरे का चार्ज ही 2.86 लाख रुपये लिया गया मतलब एक दिन का खर्च 13 हजार रुपये. 22 दिन में 85 बार अलग अलग डॉक्टरों ने उसके कमरे में विजित किया मतलब हर डॉक्टर ने एक बार में 750 रुपये लिये. डेढ़ लाख रुपये से अधिक के लैब टेस्ट किये गए, एनस्थीसिया और Critical Care का चार्ज अलग से 1.22 लाख रुपये लिए गए, एक थर्मामीटर जो बाजार में 20 रुपये तक मिल जाते हैं उसके लिए 350 रुपये लगाए गए लेकिन इतना मंहगा इलाज भी 7 साल के शौर्य प्रताप को नहीं बचा पाया.
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