इलाहाबाद हाईकोर्ट से लगा आजम खान को बड़ा झटका, कभी भी लग सकता है जौहर यूनिवर्सिटी पे ताला

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उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहित किये जाने के खिलाफ समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद आजम खान की याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किये जाने के बाद अब यह यूनिवर्सिटी कभी भी आजम खान के हाथ से छिन सकती है। जिलाधिकारी रवींद्र कुमार मांदड़ ने बुधवार को बताया कि अदालत के पिछले सोमवार के निर्णय का अध्ययन किया जा रहा है उसी के अनुसार इस मामले में कार्यवाही की जाएगी।

उन्होंने बताया कि अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की अदालत ने गत 16 जनवरी को जौहर ट्रस्ट की 70.005 हेक्टेयर जमीन, उसे देने के लिए लगाई गई शर्तें पूरी नहीं करने पर सरकार में निहित करने का आदेश दिया था। उन्होंने बताया कि उसके बाद ही जौहर विवि की जमीन को सरकार में निहित कर लिया गया था और अब उच्च न्यायालय के निर्णय का अध्ययन किया जा रहा है।

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को वर्ष 2005 में कुछ शर्तों पर इस विश्वविद्यालय का निर्माण करने के लिए जमीन दी गई थी और इन शर्तों का पालन नहीं करने के लिए राज्य सरकार ने जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू की है। आजम खान ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। रामपुर से सपा सांसद मोहम्मद आजम खान इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं, जबकि उनकी पत्नी डाक्टर तजीन फातिमा ट्रस्ट की सचिव और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान इस ट्रस्ट के सक्रिय सदस्य हैं।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद विश्वविद्यालय को अपने स्वामित्व में लेने की कानूनी अड़चनें भी दूर हो गई हैं। ऐसे में आजम खां के हाथ से कभी भी जौहर विश्वविद्यालय छिन सकता है। खां जौहर विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति हैं।