डासना देवी मंदिर में साधु पर चाकू से हमला, यति नरसिंहानंद ने कहा- हमलावर मुझे मारना चाहते थे

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित डासना देवी मंदिर में स्वामी नरेशानंद सरस्वती पर जानलेवा हमला हो गया, हमलवार ने स्वामी पर धारदार हथियार से कई प्रहार किये, गंभीर हालत में उन्हें यशोदा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. हालाँकि हमलावर के बारें में अभी कोई सुराग नहीं लग सका है, फिलहाल CCTV फुटेज की मदद से पुलिस जांच में जुट गई है, बताया जा रहा है कि जिनपर हमला हुआ वो बिहार के निवासी थे, जंतर-मंतर पर आयोजित किये गए कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आये थे, उनके रुकने का प्रबंध डासना देवी मंदिर में ही किया गया था, जिस वक्त हमला हुआ, उस समय यति नरसिंहानंद सरस्वती बगल वाले कमरे में सो रहे थे।

साधु पर हुए जानलेवा हमले के बाद डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद ने कहा कि ‘ हमलावर मुझे मारना चाहते थे, लेकिन गलतफहमी में उनपर हमला कर दिया। उन्होंने जिनपर हमला हुआ, वो मेरे जैसे लगते थे देखने में, इसलिए हमलावर मुझे समझकर उन्हें मार दिए.

इस घटना को लेकर एसपी ग्रामीण गाजियाबाद का कहना है कि “हमें सूचना मिली कि डासना इलाके में एक पुजारी को चाकू मार दिया गया है। पीड़ित समस्तीपुर से आये थे और मंदिर में ही रुके थे, फिलहाल उनका इलाज चल रहा है और वह खतरे से बाहर हैं। हम मामले से संबंधित सबूत जुटा रहे हैं और मामले की जांच के लिए टीमों का गठन किया गया है। मामले में सभी एंगल की जांच की जा रही है..डासना मंदिर में स्वामी नरेशानंद पर जानलेवा हमला सुबह तकरीबन साढ़े तीन बजे हुआ, वह मंदिर परिसर में एक खाट पर बाहर सो रहे थे..

डासना देवी मंदिर के संत यति नरसिंहानंद की दो बार ह्त्या की साजिश रची जा चुकी है, हमलावर अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो पाते, उससे पहले पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसी साल जून महीनें में यति नरसिंहानंद की ह्त्या करने के लिए मोहम्मद कासिफ ने काशी गुप्ता नाम से मंदिर में प्रवेश किया था, लोगों को शक हुआ तो तुरंत इसकी चेकिंग की, उसके बैग की जांच में सर्जिकल ब्लेड व साइनाइड कैप्सूल मिले थे.

इससे पहले जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी जान मोहम्मद यति नरसिंहानंद की ह्त्या करने कश्मीर के पुलवामा से दिल्ली आया था, डासना मंदिर पहुँच पाता उससे पहले दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। ‘डासना देवी मंदिर’ के संत यति नरसिंहानंद सरस्वती लम्बे समय से कट्टरपंथियों के निशानें पर हैं.