असम विधानसभा में पास हुआ बिल, गौतस्करों को होगी 8 साल की जेल और भरना होगा 8 लाख रूपये जुर्माना

जबसे हिमंता बिस्व सरमा ने असम के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभाली है तबसे अपने कड़े फैसलों को लेकर चर्चा में हैं, अब असम सरकार ने विधानसभा में एक और विधेयक पास करा लिया है, इस विधेयक का नाम है ‘मवेशी संरक्षण विधेयक’ 13 अगस्त को असम विधानसभा में ‘मवेशी संरक्षण विधेयक’ पारित हो गया है। विधेयक को राज्य विधानसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया। इस इस दौरान असम विधानसभा के भीतर मवेशी संरक्षण विधेयक को लेकर हंगामा हो गया क्योंकि विपक्षी दल के नेता विधेयक को पारित करने के लिए सहमत नहीं हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम विधानसभा में मवेशियों की रक्षा के लिए एक विधेयक पेश किया। जिसमें “मुख्य रूप से हिंदू, जैन, सिख और अन्य गैर-बीफ खाने वाले समुदायों” वाले क्षेत्रों में बीफ या बीफ उत्पादों की बिक्री और खरीद पर रोक लगाई गई है। किसी भी मंदिर या वैष्णव मठ के “5 किमी के दायरे में”।आंकड़ों के मुताबिक असम में 19.327 करोड़ गाय हैं।

मवेशी संरक्षण विधेयक का विरोध करते हुए AIUDF विधायक अमीनुल इस्लाम ने कहा, धार्मिक दृष्टिकोण देखते हुए यह बिल पेश किया गया और पास करा लिया गया..

इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि असम सरकार ने राज्य में गायों को वध से बचाने और संरक्षित करने के लिए राज्य विधानसभा में असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021 पेश किया है। विधेयक का उद्देश्य गाय संरक्षण कानून को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे अन्य राज्यों के समान बनाना है।

सीएम सरमा ने कहा कि नए बिल में मवेशियों के वध, उपयोग और परिवहन को नियंत्रित करने के लिए कानूनी प्रावधान शामिल हैं, मुख्य अपराध के लिए नए कानून के अनुसार, एक व्यक्ति को आठ साल तक की कैद और 8 लाख रुपये का जुर्माना। इसके बाद इस अपराध में संलिप्त पाया गया तो सजा दोगुनी होगी।