सपा सरकार में हुए रिवरफ्रंट घोटाले में CBI ने शुरू की छापेमारी, कई बड़े नेताओं के उड़े होश!

अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते समाजवादी पार्टी की सरकार में लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट हुए घोटाले में सीबीआई ने अब छापेमारी शुरू कर दी है, मिली जानकारी के मुताबिक़, सीबीआई ने रिवरफ्रंट घोटाला मामलें में कई ठिकानों पर छापेमारी की, इस मामलें में सीबीआई ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान से लेकर बंगाल तक कार्यवाही की है, CBI लखनऊ की एंटी करप्शन विंग ने रिवर फ्रंट घोटाले में करीब 190 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, लखनऊ के अलावा सीबीआई ने नोयडा, गाज़ियाबाद, बुलंदशहर, रायबरेली, सीतापुर, इटावा और आगरा में छापेमारी की…सीबीआई की इस कार्यवाही से कई बड़े नेताओं के होश उड़ गए हैं. riverfront scam SP government

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों ने लगभग 1,600 करोड़ रुपये के गोमती रिवरफ्रंट विकास परियोजना में अनियमितताओं के संबंध में गाजियाबाद, लखनऊ और आगरा सहित उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में 40 स्थानों पर छापेमारी की..राज्य के सिंचाई विभाग के पूर्व इंजीनियरों, अधीक्षण इंजीनियरों और अन्य इंजीनियरों के साथ-साथ निजी ठेकेदारों और व्यापारियों को आरोपी बनाया गया है.. riverfront scam SP government

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती रिवरफ्रंट परियोजना 2015 में सपा सरकार द्वारा शुरू की गई थी, अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। केंद्रीय एजेंसी ने पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिशों पर दिसंबर 2017 में घोटाले में मामला दर्ज किया था। नवंबर 2020 में सीबीआई ने गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सिंचाई विभाग के तत्कालीन चीफ इंजीनियर रूप सिंह यादव को गिरफ्तार किया था.. riverfront scam SP government

दरअसल योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद रिवर फ्रंट घोटाले की जांच का आदेश दिया था। इसके बाद मामले की जांच शुरू हो गई। सीबीआई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया। ईडी ने आठ में से पांच आरोपियों को पूछताछ भी की।

सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने प्रदेश सरकार के निर्देश पर सिंचाई विभाग की ओर से लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे को आधार बनाकर 30 नवंबर 2017 में नया मुकदमा दर्ज किया था। रूप सिंह यादव को अखिलेश यादव की सरकार में बेहद ताकतवर माना जाता था. इस मामले में काम पूरा नहीं हुआ और और बजट लगभग 16 करोड़ में से 1437 करोड़ खर्च कर दिये गए। काम 60 फीसदी भी नही हुआ।