योगी सरकार ने दर्ज की Twitter के खिलाफ FIR, कार्यवाही तय, जानें क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज ( fir against twitter ) की है, अब ट्विटर पर कड़ी कार्यवाही भी तय मानी जा रही है, दरअसल गाज़ियाबाद के फर्जी वीडियो को Manipulated media न दिखाने पर UP पुलिस ने ट्विटर पर FIR दर्ज ( fir against twitter ) की है, गौरतलब है कि गाजियाबाद के एक मुस्लिम अब्दुल समद का वीडियो वायरल हुआ था, वीडियो म्यूट था, दावा किया जा रहा था कि मुस्लिम होने के नाते उनके साथ मारपीट की गई और जबरन उनकी दाढ़ी काट दी गई, पुलिस जांच में सामने आया कि न तो मौलवी से जय श्री राम बोलने के लिए कहा गया और न ही उसके साथ मुस्लिम होने की वजह से मारपीट की गई. मामला नकली ताबीज बनाकर ठगी से उपजे विवाद का था, जिसे सांप्रदायिक रंग दिया गया. इतना ही नहीं आरोपी और पीड़ित पक्ष एक ही धर्म के हैं. यानि उसके बिरादर वालों ने ही पीटा।

गाजियाबाद का यह वीडियो कई दिनों से गलत दावों के साथ ट्विटर पर प्रसारित हो रहा था, लेकिन ट्विटर ने Manipulated media का टैग नहीं लगाया। जबकि कुछ दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कांग्रेस का एक कथित टूलकिट शेयर किया था, इस ट्वीट पर ट्विटर ने Manipulated media का टैग चिपका दिया था, किस आधार पर ट्विटर ने ऐसा किया, इसकी जानकारी आजतक नहीं दी, इस सम्बन्ध में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ट्विटर के दिल्ली और गुरुग्राम कार्यालय पर छापेमारी भी की थी, हालाँकि अभी तक ट्विटर के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज हुआ था. लेकिन अब योगी सरकार ने दर्ज कर ( fir against twitter ) कड़ा सबक सिखाने का मन बना लिया है.


आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर दो दिन से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति ( जिसकी पहचान अब्दुल समद के रूप में हुई ) से मारपीट की जा रही है और उसकी दाढ़ी काटी जा रही है, उसके बाद एजेंडाधारियों ने वीडियो शेयर कर कहा कि हिन्दुओं ने मुस्लिम व्यक्ति से जबरन जय श्री राम बुलवाया और दाढ़ी काट दी, मामला दिल्ली से सटे गाजियाबाद का है, हालाँकि गाजियाबाद पुलिस ने जो सच्चाई बताई, उसे सुनकर एजेण्डाबाजों को करारा आघात लगेगा, जी हाँ! पुलिस ने स्पष्ट किया कि वीडियो में जो मुस्लिम बुजुर्ग पिटता हुआ दिखाई दे रहा है, वह ताबीज बनानें का काम करता है, कुछ लोगों ने उससे ताबीज ली, ताबीज असरदार नहीं हुई, जिसके बाद उन लड़कों ने मुस्लिम बुजुर्ग की दाढ़ी भी काटी और कायदे से पिटाई भी की, यानि इसमें ‘जय श्रीराम’ का कहीं जिक्र नहीं है, इसके बावजूद एजेण्डाबाजों ने मामलें को जय श्री राम से जोड़ने का असफल कुकृत्य किया।