राममंदिर के भूमि पूजन पर सवाल उठाने वाले स्वामी स्वरूपानंद ने भी विपक्ष के सुर में मिलाया सुर!

विपक्ष द्वारा, खासतौर पर ‘आम आदमी पार्टी’ और ‘समाजवादी पार्टी’ द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं कि अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को ओर से खरीदी जा रही जमीनों में घोटाला हुआ है, जबकि जमीन बेंचने वाले ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई घोटाला नहीं हुआ हैं, वहीँ विश्व हिन्दू परिषद् ने विपक्ष के आरोपों को तथ्यों के साथ निराधार साबित कर दिया है. अब इस मसलें में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ( swami swaroopanand saraswati rammandir ) भी कूद पड़े हैं. स्वरूपानंद ने राम मंदिर ट्रस्ट के बहानें RSS और BJP पर जमकर निशाना साधा है.

शंकराचार्य ( swami swaroopanand saraswati rammandir ) ने कहा है कि सरकार ने ट्रस्ट बनाया और उसमें भ्रष्टाचारियों को शामिल कर लिया गया. चंपत राय कौन है. यह पहले कोई नहीं जानता था, लेकिन उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में में बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई. स्वरूपानंद की मानें तो बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं को दी जानी चाहिए जो विश्वविख्यात हो.

आपको बता दें कि 5 अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अयोध्या में आधारशिला रखी थी तो स्वरूपानंद ( swami swaroopanand saraswati rammandir ) ने इसका भी विरोध किया था, उन्होंने कहा कि आधारशिला रखने का सही समय नहीं है, यह अशुभ घड़ी है. कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ट्रस्ट में स्वरूपानंद भी कोई पद चाहते थे लेकिन उन्हें ट्रस्ट में शामिल ही नहीं किया गया.

विपक्षियों द्वारा लगाए जा रहे आरोप के बाद विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ अलोक कुमार ने कहा, ये जमीन हरीश पाठक और कुसुम पाठक की थी, कुछ वर्ष पहले एक ‘रजिस्टर्ड to एग्रीमेंट सेल’ उन्होंने किया सुल्तान अंसारी, रविमोहन तिवारी और दूसरे लोगों के साथ, कुछ वर्ष पहले वह एग्रीमेंट हुआ था तो उसी समय के प्राइस यानि रेट/दाम पर हुआ, और उस समय का प्राइस था दो करोड़ रूपये। अब इसकी कीमत है लगभग 20 करोड़ हैं, लेकिन हम लोगों ने विनती की साढ़े 18 करोड़ में मिली ( विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं )