पंजाब: मुस्लिमों के लिए सिख लोग बनवा रहे मस्जिद, मुस्लिमों के लिए गुरुद्वारे के दरवाजे भी खोले!

image credit - hindustan times
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पंजाब के मोगा में एक गाँव है भूलर, यहाँ चार मुस्लिम परिवार रहते हैं, गाँव में सिखों की संख्या ज्यादा है, इस गाँव में सात गुरुद्वारे और दो मंदिर हैं, अब गाँव के सेकुलर लोगों ने मुस्लिमों के लिए मस्जिद बनवानें का फैसला लिया है, सेकुलर लोगों की इस पहल की एक ओर सराहना हो रही है तो वहीँ दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि इस पहल के बुरे परिणाम 20-30 साल बाद देखने को मिल सकते हैं. इंडिया टुडे के मुताबिक़, मस्जिद बनवानें के लिए गांववालों ने 100 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का योगदान दिया और सहयोग किया। ( mosques in Moga Punjab )

गाँव के सरपचं पाला सिंह (45) ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि “1947 में विभाजन से पहले एक मस्जिद थी लेकिन यह समय के साथ खंडहर में बदल गई। हमारे गांव में चार मुस्लिम परिवार हैं जिन्होंने वापस रहना चुना और तब से, हमारे गांव में हिंदू, मुस्लिम और सिख परिवार सद्भाव में रहते हैं। सरपंच ने कहा, गाँव वाले चाहते हैं कि मुस्लिम परिवारों को भी उनकी नवाज पढ़ने की जगह मिले। इसलिए यह तय किया गया है कि मस्जिद को उसी जमीन पर बनाया जाएगा जहां वह पहले थी।” सरपंच ने कहा, मस्जिद गाँव में पूजा का 10 वां स्थान होगा। ( mosques in Moga Punjab )

मोगा जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर भालूर गांव में एक गुरुद्वारे ने एक मस्जिद के शिलान्यास समारोह के लिए अपने दरवाजे खोल दिए। समारोह एक पुरानी मस्जिद के स्थान पर होना था जिसे फिर से बनाया जा रहा है, लेकिन रविवार को बारिश हुई। नतीजतन, समारोह को स्थानीय गुरुद्वारे में स्थानांतरित कर दिया गया, और गांव के सरपंच पाला सिंह ने आधारशिला रखी। ( mosques in Moga Punjab )

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, कंवर खान ने कहा, “गांव में सिर्फ पांच मुस्लिम परिवार हैं और हम मस्जिद के पुनर्निर्माण की कोशिश कर रहे हैं। जैसे ही बारिश शुरू हुई, हमने तुरंत गुरुद्वारा कमेटी से संपर्क किया और इसने हमारा स्वागत किया। यह प्यार और भाईचारे का एक बेहतरीन उदाहरण है.

मुस्लिम मौलवी मौलाना उस्मान रहमानी लुधियानावी ने कहा, “यह दिन इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। एक सच्चा सिख और सच्चा मुसलमान कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। इसी महीनें की शुरुवात में पंजाब के मलेरकोटला जिले के एक गांव के बीच में एक मस्जिद बनाने के लिए एक सिख परिवार ने अपनी पुश्तैनी जमीन दान में दी थी।