G-7 शिखर बैठक को PM मोदी ने किया सम्बोधित, जानिये किन-किन मुद्दों पर रखी अपनी बात

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने दो दिन तक चली जी-7 शिखर बैठक (PM Modi G-7) के तीन सत्रों को संबोधित किया। यह बैठक आज शाम समाप्‍त हुई। विदेश मंत्रालय ने आर्थिक संबंधों के अपर सचिव पी हरीश ने संवाददाताओं को बताया कि श्री मोदी ने मानव जीवन को बेहतर, सुदृढ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के विभिन्‍न पक्षों पर संबोधन किया। प्रधानमंत्री ने आज जलवायु परिवर्तन और खुले समाज से संबंधित सत्रों को संबोधित किया। जलवायु परिवर्तन पर मोदी ने सामूहिक कार्यवाही का आह्वान किया और कहा कि इस चुनौती से अलग-अलग नहीं निपटा जा सकता।

उन्‍होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने की कार्रवाई में भारत की उपलब्धियों का उल्‍लेख किया और कहा कि जी-20 देशों में से भारत एकमात्र ऐसा देश है जो पेरिस समझौते का पालन कर रहा है। (PM Modi G-7)

मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की कार्रवाई में सभी पक्षों प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण, वित्‍त, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली परिवर्तन, विकासशील देशों को विकास के लिए आवश्‍यक मदद देना आदि शामिल करने की जरूरत है। उन्‍होंने जी-7 देशों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों के लिए सौ अरब डालर प्रतिवर्ष देने के अधूरे वादे को पूरा करने का आह्वान भी किया। उन्‍होंने भारत की वैश्विक पहल, अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा प्रबंधन बुनियादी ढांचे के गठबंधन का भी उल्‍लेख किया। (PM Modi G-7)

तीसरा सत्र खुले समाज और खुली अर्थव्‍यवस्‍था से संबंधित था। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी इसमें प्रमुख वक्‍ता थे। उन्‍होंने लोकतंत्र, विचारों की स्‍वतंत्रता और आजादी की भारत की सभ्‍यतागत प्रतिबद्धता का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कहा कि भारत जी-7 और अतिथि देशों का स्‍वाभाविक साथी है और आतंकवाद, हिंसक कट्टरवाद तथा तानाशाही के खतरों से निपटने के लिए उनके साथ मूल्‍य साझा करता है। (PM Modi G-7)

उन्‍होंने जोर देकर कहा कि खुले समाज में संकट होते हैं और प्रौद्योगिकी कंपनियों तथा सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म को अपने उपयोगकर्ताओं के लिए साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

जी-7 देशों के नेताओं ने स्‍वतंत्र, मुक्‍त, समग्र और नियम आधारित हिन्‍द प्रशान्‍त क्षेत्र और क्षेत्र के भागीदारों के साथ सामूहिक प्रयासों की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की। श्री मोदी ने खुलेपन, लोकतांत्रिक, पारदर्शिता और समग्रता के सिद्धातों पर बहु स्‍तरीय प्रणाली के सुधारों पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कल के सत्र में विश्‍व व्‍यापार संगठन में ट्रिप्‍स से छूट के भारत और दक्षिणी अफ्रीका के प्रस्‍ताव के लिए समर्थन का आह्वान किया। उनके इस आह्वान का दक्षिणी अफ्रीका के राष्‍ट्रपति सिरिल रामफोसा ने समर्थन किया। ऑस्‍ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्‍कॉट मोरीसन और विश्‍व व्‍यापार संगठन के महानिदेशक डॉक्‍टर ओकोंजो ईवेएला तथा संयुक्‍त राष्‍ट्र के महासचिव अंतोनियो गुटेरस ने भी इसका समर्थन किया।

श्री हरीश ने कहा कि भारत के लिए जी-7 और अतिथि देश महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि भारत के प्रत्‍येक सदस्‍य देश के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सांस्‍कृतिक संबंध हैं। उन्‍होंने कहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्‍थायी सदस्‍य देशों में से तीन जी-7 के सदस्‍य हैं। भारत को जी-7 की बैठक में अतिथि देश के रूप में आमंत्रित करने के ब्रिटेन के सुझाव को स्‍वीकार किया गया।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को जी-7 की बैठक में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने आमंत्रित किया था। ब्रिटेन फिलहाल जी-7 का अध्‍यक्ष है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के साथ ही ऑस्‍ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्रियों को भी जी-7 की बैठक में आमंत्रित किया गया था।

ब्रिटेन ने भारत से कहा है कि हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का जी-7 की बैठक में व्‍यक्तिगत रूप से स्‍वागत नहीं कर पाने से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को खेद है, लेकिन वह इस फैसले के कारणों को समझते हैं और उसका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के बैठक में भाग लेने और अन्‍य नेताओं के साथ उनकी बैठकों का उचित और सुचारू प्रबंध किया गया था। बैठक में प्रत्‍येक नेता के समक्ष श्री मोदी को दर्शाने वाला एक स्क्रीन लगाया गया था जिससे प्रत्‍येक नेता को उनकी मौजूदगी का एहसास होता रहे।