रामजन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन पर झूठ फैला रहे विपक्ष का हुआ पर्दाफाश, जानिए हकीकत

विपक्ष द्वारा, खासतौर पर ‘आम आदमी पार्टी’ और ‘समाजवादी पार्टी’ द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं कि अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को ओर से खरीदी जा रही जमीनों में घोटाला हुआ है, आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने अयोध्या में 18.5 करोड़ रुपये में जमीन का एक टुकड़ा खरीदा था, जिसे राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदे जाने से 10 मिनट पहले सिर्फ 2 करोड़ रुपये में बेचा गया था. ऐसा ही आरोप समाजवादी पार्टी ने भी लगाया है, इन सबके सुर में सुर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मिलाया है
विपक्ष के इस झूठ का पर्दाफाश ( opposition expose rammandir land ) किया है अविनाश श्रीवास्तव ने एक थ्रेड के जरिये। अविनाश ने तथ्यों के साथ बताया कि कैसे विपक्ष झूठा प्रोपोगैंडा फैला रहा है…( opposition expose rammandir land )

अविनाश लिखते हैं कि ‘विक्रेता कुसुम पाठक का सुल्तान अंसारी के साथ 2 साल पहले दिनांक 17-Sep-19 को 2 करोड़ की तयशुदा कीमत में हुआ एग्रीमेंट बड़ी चालाकी से छिपा दिया गया विपक्ष की तरफ से, क्यों? उक्त एग्रीमेंट से स्पष्ट होता है कि Kusum Pathak की Sultan Ansari के साथ, ज़मीन की 2 करोड़ रुपये में जो सहमती हुई उसकी मियाद 3 साल थी। अपनी बात को मजबूती देने के लिए उन्होंने कुछ दस्तावेज भी शेयर किये हैं.


अविनाश के मुताबिक, एक महत्वपूर्ण बात की ज़मीन की मालियत 5.79 करोड़ थी, 01/08/2017 के अनुसार लेकिन चूँकि तब ज़मीन का विवाद चल रहा था इसलिए Kusum Pathak संभवतः उक्त ज़मीन को 2 करोड़ में ही बेंचने को राज़ी हो गईं। Champat Rai जी के स्टेटमेंट से स्पष्ट हुआ की उक्त जमीन 5 मिनट में महँगी नहीं हुई बल्कि उक्त जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को बेचने से पहले कानूनी आवश्यकता के अनुरूप, 2 साल पहले यानि कि अयोध्या जजमेंट आने के पहले के विक्रेताओं के आपसी तयशुदा रेट के एग्रीमेंट का बैनामा 2021 में करवाया गया।

झूठा प्रोपगंडा चलाया गया की 18-Mar-21 को शाम 7:10 पर ज़मीन खरीदी गई, जबकि सच्चाई ये है की उक्त जमीन 2 वर्ष पूर्व 17-Sep-19 को खरीदी गई, अर्थात Ram Janmbhumi पर Supreme Court का फैसला आने से पूर्व। 09-Nov-2019 को माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला रामजन्मभूमि के पक्ष आया। इसमें कोई दोराय नहीं है की कोर्ट का फैसला आ जाने के बाद अयोध्या और राममंदिर के आसपास की ज़मीन महँगी होने लगी।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद, रामजन्मभूमि ट्रस्ट नें आसपास अतिरिक्त ज़मीन खरीदने का प्रयास चालू किया। रामजन्मभूमि ट्रस्ट नें उक्त महत्वपूर्ण ज़मीन के लिए सुल्तान अंसारी संपर्क किया, फिर चूंकि डील एक नंबर में हो रही थी तो स्टाम्प ड्यूटी पे की गई और कानूनी रूप से उक्त ज़मीन का बैनामा 18-Mar-21 को कराया गया। ( opposition expose rammandir land )

उसी वक़्त उक्त ज़मीन का 3 साल की मियाद में Kusum Pathak को पूरा पेमेंट करने के बाद 17-Sep-19 वाला एग्रीमेंट कैंसिल हुआ और प्रॉपर्टी Sultan Ansari को ट्रान्सफर हुई। तत्पश्चात, रामजन्मभूमि ट्रस्ट नें 18-Mar-21 को विक्रेता Sultan Ansari से रजिस्टर्ड सेल्स डीड साइन की। पूरी स्टाम्प ड्यूटी पे की गई और एक नंबर में 2021 के मार्केट रेट 18.5 करोड़ में सौदा हुआ।

साभार – अविनाश श्रीवास्तव ट्विटर थ्रेड