बंगाल में हुई हिंसा की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सात सदस्यीय समिति का किया गठन

कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा की शिकायतों की जांच के लिए एक समिति गठित की है। सात सदस्यीय इस समिति की अध्यक्षता आयोग के सदस्य राजीव जैन करेंगे। समिति राज्य में चुनाव के बाद की हिंसा के सभी मामलों की जांच करेगी, जिनकी शिकायतें पहले ही मिल चुकी हैं या जो आयोग को प्राप्त हो सकती हैं। NHRC Bengal Violence

एक बयान में आयोग ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके मामलों की जांच की जाएगी और समिति वर्तमान स्थिति के बारे में उच्च न्यायालय को एक विस्‍तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और लोगों में विश्वास बहाली सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगा ताकि वे शांति से अपने घरों में रह सकते है। समिति प्रथम दृष्टया अपराध के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और इस मुद्दे पर सोची-समझी चुप्पी बनाए रखने वाले अधिकारियों को भी इंगित करेगी। NHRC Bengal Violence

ममता सरकार ने याचिका दायर करके कोर्ट से कहा, जांच का आदेश रोक दीजिए। हमें जांच करने दीजिए। हालाँकि अदालत ने ममता सरकार की याचिका खारिज कर दी, यानि बंगाल हिंसा कि जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ही करेगा। सवाल यह उठता है कि ममता सरकार को NHRC की जांच से इतना डर क्यों लगता है…NHRC Bengal Violence

बंगाल सरकार की याचिका को आज खारिज करते हुए, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि 18 जून का आदेश राज्य द्वारा अदालत के विश्वास को प्रेरित करने में विफल रहने के बाद पारित किया गया था। बेंच, जिसमें जस्टिस सौमेन सेन, सुब्रत तालुकदार, आईपी मुखर्जी और हरीश टंडन भी शामिल हैं, ने कहा कि उच्च न्यायालय को अपने पहले के फैसले को संशोधित करने या उस पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं मिलता है। बेंच ने कहा, NHRC को केवल एक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया था और सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।