पहले चाचा ने बगावत की, फिर अध्यक्ष पद छीना, अब चिराग पासवान का बँगला भी छिनने की कगार पर है

लोकजनशक्ति पार्टी ( लोजपा ) पर कब्जे को लेकर चाचा और भतीजे के बीच भीषण भिड़ंत शुरू हो चुकी है, पहले लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ( chirag paswan ) के सगे चाचा पशुपति कुमार पारस ने पार्टी के पाँचों सांसदों के साथ बगावती रुख अख्यितार किया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर चिराग को बेदखल करते हुए खुद लोकसभा में पार्टी के नेता बन गए, इसके बाद चिराग को लोजपा अध्यक्ष पद से भी हटा दिया, इसके बाद चिराग पासवान ( chirag paswan ) ने अपने चाचा समेत सभी को पार्टी से निष्काषित करके प्राथमिक सदस्य्ता रद्द कर दी. पार्टी पर कब्जे का यह मामला अब चुनाव आयोग जाएगा। वहीं से पार्टी का ड्राइवर तय होगा। पिता की मृत्यु के बाद चाचा ने जिस तरह का रौद्र रूप दिखाया है, चिराग पासवान ने शायद ही उसकी कल्पना कभी की होगी।

लोकसभा में लोजपा का नेता का पद और लोजपा अध्यक्ष का पद छिनने के बाद अब सांसद चिराग पासवान का बंगला भी छिनने के कगार पर है, लोजपा के संसदीय दल के नेता पद से बेदखल होने के बाद चिराग पासवान ( chirag paswan ) के लिए 12 जनपथ वाले बंगले को बचाए रखना मुश्किल हो सकता है। अब चिराग सिर्फ एक सांसद हैं जिनके लिए नियमतः फ्लैट या डूप्लेक्स आवंटित होता है। 1989 से सोनिया गांधी के पड़ोस, 12 जनपथ में रहते थे स्वर्गीय रामविलास पासवान।


लोजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक मंगलवार को संसदीय दल के नेता पशुपति कुमार पारस के आवास पर हुई। बैठक में सर्वसम्मति से चिराग पासवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया। उनकी जगह सूरजभान सिंह को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष को यह निर्देश दिया गया कि वह 5 दिन के अंदर राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाएं।

सोमवार को चिराग पासवान अपने चाचा के घर पहुंचे थे, चाचा के घर के बंद गेट पर न सिर्फ उन्‍हें 20 मिनट तक इंतजार कराया गया बल्कि डेढ़ घंटा इंतजार के बाद भी चाचा से मुलाकात नहीं हो सकी। पशुपति कुमार पारस को चिराग को छोड़कर पार्टी के सभी पांच सांसदों का समर्थन होने के चलते इस वक्‍त अपना पड़ला भारी लग रहा है।