बंगाल हिंसा: बहुत बुरी तरह फंसी TMC सरकार, कलकत्ता हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उड़े ममता के होश

चुनाव बाद पश्चिम बंगाल में बड़े पैमानें पर हुई हिंसा को लेकर अब राज्य की ममता बनर्जी सरकार फंसती हुई दिखाई दे रही है, दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल हिंसा के आरोपों की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी थी, ममता सरकार ने कोर्ट से कहा, जांच का आदेश रोक दीजिए। हमें जांच करने दीजिए। हालाँकि अदालत ने ममता सरकार की याचिका खारिज कर दी, यानि बंगाल हिंसा कि जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ही करेगा। सवाल यह उठता है कि ममता सरकार को NHRC की जांच से इतना डर क्यों लगता है…
nhrc investigate bengal volence

बंगाल सरकार की याचिका को आज खारिज करते हुए, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि 18 जून का आदेश राज्य द्वारा अदालत के विश्वास को प्रेरित करने में विफल रहने के बाद पारित किया गया था। बेंच, जिसमें जस्टिस सौमेन सेन, सुब्रत तालुकदार, आईपी मुखर्जी और हरीश टंडन भी शामिल हैं, ने कहा कि उच्च न्यायालय को अपने पहले के फैसले को संशोधित करने या उस पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं मिलता है। बेंच ने कहा, NHRC को केवल एक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया था और सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। nhrc investigate bengal volence

WBSLSA के सदस्य सचिव ने उल्लेख किया कि कई मामलों में शिकायतों को पुलिस अधीक्षकों या संबंधित पुलिस थानों को भेजा गया था लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी। nhrc investigate bengal volence

उल्लेखनीय है कि बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बड़े पैमानें पर खुनी हिंसा हुई, भाजपा ने आरोप लगाया कि उसके दर्जनों लोगों को मौत के घाट उतारा गया, लोगों के घर व् भाजपा के कई दफ्तर जलाये गए, महिलाओं से बलात्कार किये गए, सैकड़ों लोग जान बचाने के लिए पलायन के लिए मजबूर हुए, देशभर की 2,000 से अधिक महिला वकीलों ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एन वी रमना को पत्र लिखकर चुनाव बाद बंगाल में हुई हिंसा का संज्ञान लेने और और मामलें की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिंग्शन टीम ( SIT ) गठित करने की मांग की थी।