स्पोर्ट यूनिवर्सिटी पर अरविन्द केजरीवाल की जादूगरी से भाजपाई हैरान, जानिये क्यों

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Arvind Kejriwal Sports University started without any construction and Kulpati Karnam Malleswarialso appointed without phisical structure and academic session in real.

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने 23 जून 2021 को खाली जमीन पर ही स्पोर्ट यूनिवर्सिटी शुरू कर दी और कुलपति का भी ऐलान कर दिया, अरविन्द केजरीवाल की स्पोर्ट यूनिवर्सिटी (Arvind Kejriwal Sports University) देखकर भाजपाई हैरान हैं.

अरविन्द केजरीवाल की जादूगरी देखकर भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी, उन्होंने लिखा – न टेंडर हुआ, न एक ईंट लगी, ज़मीन तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. साहिब सिंह जी ने 1996 में ले ली थी। ख़ाली ज़मीन में दिल्ली वालों को यूनिवर्सिटी दिखा दो और कुलपति भी बना दी। कर्णम मल्लेश्वरी दुनिया की पहली ख़ाली ज़मीन की कुलपति होंगी। कल हो सकता है @ArvindKejriwal डिग्री भी बाँट दे।

आपको बता दें अरविन्द केजरीवाल ने जहाँ पर स्पोर्ट यूनिवर्सिटी शुरू की है वहां पर अभी खाली जमीन है, कोई निर्माण नहीं हुआ है, ना एजुकेशन शुरू हुई है लेकिन अरविन्द केजरीवाल ने अपने ट्वीट में लिखा कि दिल्ली में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी शुरू हो रही है, देखिये –

केजरीवाल ने कागज़ पर बनी स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की कुलपति का भी ऐलान कर दिया है. उन्होंने लिखा –

हमारा बहुत बड़ा सपना पूरा हुआ। मुझे ये कहते हुए बेहद गर्व है कि ओलम्पिक पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी जी पहली कुलपति ( Delhi Sports University VC ) होंगी। आज उनके साथ मुलाक़ात हुई और विस्तार से चर्चा हुई। “उपराज्यपाल, जो दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं, ने पद्मश्री पुरस्कार विजेता कर्णम मल्लेश्वरी को विश्वविद्यालय का पहला कुलपति नियुक्त किया।

मल्लेश्वरी ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला भारोत्तोलक हैं। उन्होंने 2000 में सिडनी ओलंपिक में ‘स्नैच’ और ‘क्लीन एंड जर्क’ श्रेणियों में 110 किलोग्राम और 130 किलोग्राम भार उठाकर इतिहास रच दिया था।

दिल्ली विधानसभा ने 2019 में दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी (DSU) स्थापित करने के लिए एक विधेयक पारित किया था, जो अन्य खेलों के बीच क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान करेगा। (Arvind Kejriwal Sports University)

मल्लेश्वरी का रिकॉर्ड अभी भी बरकरार है क्योंकि भारत की किसी भी महिला ने ओलंपिक में भारोत्तोलन में पदक नहीं जीता है। उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार और 1999 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह 1999 में पद्म श्री पुरस्कार की प्राप्तकर्ता भी हैं। मल्लेश्वरी अब FCI में मुख्य महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं।

मल्लेश्वरी श्रीकाकुलम के वूसावनिपेटा की रहने वाली हैं। उन्होंने अपने भारोत्तोलन करियर की शुरुआत मारुति युवजन व्यायाम मंडली से की थी। उन्होंने 1993, 1994, 1995 और 1996 में विश्व चैंपियनशिप में दो स्वर्ण और दो रजत सहित कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते।

मल्लेश्वरी ने 1997 में एक साथी भारोत्तोलक राजेश त्यागी से शादी की। हालांकि उन्होंने 2002 के राष्ट्रमंडल खेलों में प्रतिस्पर्धा करने की योजना बनाई, लेकिन अपने पिता की मृत्यु के कारण उन्हें वापस लेना पड़ा। एथेंस 2004 ओलंपिक में पदक जीतने में विफल रहने के बाद, उन्होंने सन्यास की घोषणा की.