SM पर उठी अजमेर शरीफ की फंडिंग को सार्वजनिक करने की मांग, ट्रेंड हुआ #अजमेर_फंडिंग_सार्वजनिक_करो

ajmer sharif
image tweeted - @sufimusafir

सोशल मीडिया पर इस समय अजमेर शरीफ दरगाह की फंडिंग ( ajmer sharif funding ) को सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर इस समय #अजमेर_फंडिंग_सार्वजनिक_करो टॉप पर ट्रेंड हो रहा है, इस ट्रेंड के जरिये लोग फंडिंग ( ajmer sharif funding )
को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं, लोगों का मानना है कि अजमेर फंडिंग सार्वजनिक करनी चाहिए तथा अब तक इन पैसों को कहां ट्रांसफर किया जाता है, इसकी भी जांच करनी चाहिए। ताकि जनता को हकीकत पता चल सके.


एक ट्विटर यूजर ने लिखा, जामा मस्जिद, ताजमहल ओर अजमेर दरगाह की रजिस्ट्री सावर्जनिक ( ajmer sharif funding ) होने चाहिए ताकि, देशवासियो को भी पता चले कि ये जमीन किसने और कितने पैसे मे खरीदी थी..लोगों का मानना है कि जैसे राममंदिर निर्माण की हर गतिविधि सार्वजनिक है, वैसे ही मस्जिद और दरगाहों को भी सार्वजनिक करना चाहिए। मंदिरों का धन जब सार्वजनिक हो सकता है तो मस्जिदों का क्यों नहीं?

उल्लेखनीय है कि अजमेर शरीफ़ राजस्थान के अजमेर में स्थित है, यह मोइनुद्दीन चिश्ती ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह है, जिसमें उनका मक़बरा स्थित है। दरगाह अजमेर शरीफ़ का मुख्य द्वार निज़ाम गेट कहलाता है, क्योंकि इसका निर्माण हैदराबाद स्टेट के उस समय के निज़ाम, मीर उस्मान अली ख़ाँ ने करवाया था.

अजमेर शरीफ में हिन्दू और मुस्लिम दोनों चढ़ावा चढ़ाते हैं, लेकिन अभी तक यह कभी सार्वजनिक नहीं हुआ कि जो धन यहाँ चढ़ता है, वो कहाँ जाता है, खोद के गाड़ा तो जाता नहीं होगा,. देश में इतनी बड़ी कोरोना आपदा आई, कई मंदिरों से सैकड़ों करोड़ रूपये दान किये लेकिन अजमेर शरीफ ने एक टका भी न दिया।

पीएम केयर्स फंड का गठन कर पीएम मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे कोरोना से मुकाबले के लिए इसमें ज्यादा से ज्यादा दान करें। इसके बाद से ही देश के बड़े-बड़े उद्योगपति, एक्टर, क्रिकेटर, मंदिर, मठ संकट की इस घडी में देश के साथ खड़े हो गए और यथासंभव दान करने लगे। परन्तु मस्जिद, मदरसा व् दरगाह ने एक पैसा दान नहीं किया?