बंगाल हिंसा पर स्वतः संज्ञान क्यों नहीं ले रहा सुप्रीम कोर्ट? SC के वकील ने ही उठाये सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने एक बार फिर से बंगाल में भारी बहुमत के साथ सरकार बना ली है, सरकार बनते ही गुंडों ने आतंक मचाना शुरू कर दिया है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बंगाल के कुछ जिलों के हिन्दू अपनी जान बचाने के लिए पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, ज्यादातर वो हिन्दू हिंसा का शिकार बन रहे हैं जो भाजपा से जुड़े हैं.

बंगाल में हो रही हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान न लेने पर अब सुप्रीम कोर्ट के वकील ने ही सवाल दाग दिया है, वकील करुणेश शुक्ला ने कहा, छोटी छोटी बातों को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान में लें लिया जाता है, लेकिन बंगाल हिंसा पर चुप क्यों हैं, क्या हिन्दुओं का घर जलाना, औरतों का बलात्कार हिंसा नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील करुणेश शुक्ला ने अपने ट्वीट में लिखा, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का मेम्बर होने के नाते, मुझे आज बहुत ग्लानि और आश्चर्य हो रहा है। कि छोटी छोटी बातों को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान में लें लिया जाता है। बंगाल में हिन्दुओं के घर जलाना, औरतों का सामूहिक बलात्कार हिंसा नहीं है, क्यूं चुप हैं?

बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, फेसबुक में वीडियो अपलोड करने के तुरंत बाद मारे गए अभिजीत सरकार समेत दूसरे लोगों का उदाहरण दिया। हिंसा की CBI जांच की मांग की है इसके अलावा राज्य सरकार से की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट लेने की भी मांग की है.

भाजपा प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि ‘700 गांवों में हिंसा, रेप और हत्याएं हो रही हैं, ये सब एक समुदाय विशेष लोग कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि यह सब ममता बनर्जी और टीएमसी के नेताओं के इशारे पर हो रहा है, भाजपा कार्यकर्ता घर छोड़कर अज्ञात स्थानों पर जा रहे हैं, आजतक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए विजयवर्गीय ने कहा, गुंडे बीजेपी कार्यकर्ताओं के घर में आग लगा रहे हैं, महिलाओं से रेप कर रहे हैं।