इजराइल-फिलिस्तीन विवाद: संयुक्त राष्ट्र में पास हुआ अहम प्रस्ताव, भारत के इस कदम से दुनिया हैरान

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच 12 दिनों तक चला खूनी संघर्ष अब समाप्त हो गया है, 11 दिन तक चले संघर्ष के दौरान कथित उल्लंघनों एवं अपराधों की जांच की जाएगी. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के एक प्रस्ताव पर वोटिंग हुई है. भारत के रुख से पूरी दुनिया हैरान हो गई है, दरअसल भारत ने वोटिंग से खुद को अलग रखा. भारत के अलावा फ्रांस, इटली, नेपाल और जापान सहित 13 अन्य देशों ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

संयुक्त राष्ट्र निकाय के जिनेवा स्थित मुख्यालय में गुरुवार को बुलाए गए विशेष सत्र की समाप्ति पर यह प्रस्ताव स्वीकार किया गया, क्योंकि 24 देशों ने इसके पक्ष में वोट डाला जबकि नौ ने इसका विरोध किया. भारत समेत 14 देशों ने वोटिंग से खुद को अलग कर लिया। इजराइल ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया, यानि भारत ने भी वोटिंग न करके एक तरह से इजराइल का ही साथ दिया। पहले भारत ऐसा नहीं करता था।

सत्र का उद्घाटन करते हुए, संयुक्त राष्ट्र के rights प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने गाजा पर हुए हमलों में मारे गए और घायल हुए लोगों के बारे में विशेष चिंता व्यक्त की. उन्होंने यह भी कहा कि हमास की ओर से इस्राइल पर अंधाधुंध रॉकेट दागना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। हालाँकि इस्राइल ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा पारित किये गए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि वह सहयोग नहीं करेगा। इजरायल के प्रधान बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा, “आज का शर्मनाक फैसला संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद इजरायल विरोधी मानसिकता से ग्रस्त है, इसका एक और उदाहरण।

नेतन्याहू ने कहा, परिषद जनसंहार करने वाले आतंकवादी संगठन, जिसने जानबूझकर इजरायली नागरिकों को निशाना बनाया और गाजा के लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल किया, उस (हमास) के अपराधों को छिपा दिया गया है.’