बंगाल हिंसा पर आया RSS का बयान, जानें क्या बोले, सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबाले

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने एक बार फिर से बंगाल में भारी बहुमत के साथ सरकार बना ली है, सरकार बनते ही गुंडों ने आतंक मचाना शुरू कर दिया है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बंगाल के कुछ जिलों के हिन्दू अपनी जान बचाने के लिए पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, ज्यादातर वो हिन्दू हिंसा का शिकार बन रहे हैं जो भाजपा से जुड़े हैं. बंगाल में हो रही हिंसा पर अब आरएसएस का आधिकारिक बयान सामने आया है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( आरएसएस ) के सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबाले ने बंगाल हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा, राज्य सरकार से मांग की है कि हिंसा को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं। दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, हम नवनिर्वाचित राज्य सरकार से आग्रह करते हैं कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य में चल रही हिंसा को तुरंत समाप्त कर कानून का शासन स्थापित करना, दोषियों को अविलंब गिरफ़्तार कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना।

आरएसएस सरकार्यवाहक ने कहा, हिंसा पीड़ितों में मन में विश्वास व सुरक्षा का भाव पैदा कर पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाना होना चाहिए। हम केंद्र सरकार से भी आग्रह करते है कि वो बंगाल में शांति कायम करने के लिए आवश्यक हर संभव कदम उठाए और सुनिश्चित करे कि राज्य सरकार भी इस दिशा में कार्रवाई करे।

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, लोकतंत्र में चुनावों की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चुनावों के इसी क्रम में पश्चिम बंगाल का चुनाव अभी-अभी सम्पन्न हुआ है। बंगाल के सम्पूर्ण समाज ने इसमें बढ़-चढ़ कर सहभाग लिया है। चुनावों में स्वाभाविक ही पक्ष-विपक्ष, आरोप-प्रत्यारोप कभी-कभी भावावेश में मर्यादाओं को भी पार कर देता है। पर, हमें यह सदैव स्मरण रखना होगा कि सभी दल अपने ही देश के दल हैं और चुनावों की प्रक्रिया में भाग लेने वाले प्रत्याशी, समर्थक, मतदाता सभी अपने ही देश के नागरिक हैं।

उन्होंने कहा, चुनाव परिणाम के तुरंत बाद उन्मुक्त होकर अनियंत्रित तरीक़े से हुई राज्यव्यापी हिंसा न केवल निंदनीय है, बल्कि पूर्व नियोजित भी है। समाज-विघातक शक्तियों ने महिलाओं के साथ घृणास्पद बर्बर व्यवहार किया, निर्दोष लोगों की क्रूरतापूर्ण हत्याएँ कीं, घरों को जलाया, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों-दुकानों को लूटा एवं हिंसा के फलस्वरूप अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के बंधुओं सहित हज़ारों लोग अपने घरों से बेघर होकर प्राण-मान रक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों पर शरण के लिए मजबूर हुए हैं। कूच-बिहार से लेकर सुंदरबन तक सर्वत्र जन सामान्य में भय का वातावरण बना हुआ है।