पहले दवा, फिर बीमारी: दलालों के जरिये भारत में घुसपैठ करने की फ़िराक में फाइजर, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

आज सुबह-सुबह खबर आई कि अमेरिका ने 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक के वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है। भारत में पिछले तीन-चार दिनों से से हर न्यूज़ चैनलों पर खबर चल रही है कि देश में कोरोना की तीसरी लहर आने वाली है और यह बच्चों को प्रभावित करेगी। इससे यह प्रतीत होता है कि फाइजर नें पहले बच्चों के लिए वैक्सीन बनाना शुरू कर दिया और फिर इसके बाद यह सूचना फैलाई गई कि तीसरी लहर आने वाली है जो बच्चों के लिए खतरनाक होगी। यानि पहले दवा फिर बीमारी। कुछ एक्सपर्ट्स के हवाले से भारत में चार दिन पहले से यह खबर चलने लगना कि तीसरी लहर आने वाली है और उसके बाद अमेरिका में बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक के वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के मंजूरी मिलना, कई सवाल खड़े करता है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या? फाइजर की वैक्सीन बिकवाने के लिए भारत में तीसरी लहर का हौवा खड़ा किया जा रहा है, अगर ऐसा नहीं है तो फाइजर ने इतने कम में बच्चों के लिए वैक्सीन कैसे बना दी, सनद रहे फाइजर शुरू से ही अपनी वैक्सीन भारत में बेंचने के लये तड़प रहा है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पा रही है. न ही मिलने की संभावना है।

फाइजर नें अब अपने दलालों के माध्यम से भारत में लॉबीइंग प्रारंभ कर दी है। यानि दलालों के जरिये फाइजर भारत में घुसपैठ करना चाहता है, क्योंकि भारत में बन रही स्वदेशी वैक्सीन ने फाइजर जैसों का धंधा चौपट करके रख दिया है, अगर भारत में कोवैक्सीन न बनी होती तो भारत को मजबूरन फाइजर या अन्य विदेशी वैक्सीन खरीदना पड़ता। और मोटी रकम चुकानी पड़ती। फाइजर इस समय दुनिया की सबसे महंगी वैक्सीनों में से एक है. फ़ाइजर के दलाल अब आर्टिकल/लेख, अन्य तिकड़मों के जरिये सरकार पर दबाव डालेंगे कि वो बच्चों के लिए फाइजर वैक्सीन खरीदे।