केजरीवाल को बड़ा झटका: अब दिल्ली में होगा ऑक्सीजन का ऑडिट, सुप्रीम कोर्ट ने किया टास्क फोर्स का गठन

देश में ऑक्सीजन के आवंटन, ज़रूरी दवाओं की उपलब्धता और कोविड से निपटने की भविष्य की तैयारियों पर सुझाव देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 12 सदस्यीय नेशनल टास्क फोर्स बनाया। टास्क फोर्स में 10 प्रसिद्ध डॉक्टर हैं, कैबिनेट सेक्रेट्री या उनकी तरफ से मनोनीत अधिकारी संयोजक। स्वास्थ्य सचिव भी सदस्य हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केंद्र सरकार से मिल रहे ऑक्सीजन पर राज्य को भी जवाबदेह बनाना ज़रूरी है, टास्क फोर्स हर राज्य में ऑक्सीजन ऑडिट के लिए टीम बनाए। दिल्ली के लिए ऑडिट टीम SC ने खुद बनाई है, इस टीम में दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, मैक्स हेल्थकेयर के डॉ. संदीप बुद्धिराजा और केंद्र सरकार व् दिल्ली सरकार के एक-एक आईएएस शामिल होंगें।

आपको बता दें कि शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था, दिल्ली में ऑक्सीजन का ऑडिट हो, दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने इसका विरोध किया था, हालाँकि अब सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन के ऑडिट का आदेश दे दिया है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बुधवार को दिल्ली को 730 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिला. दिल्ली के पास अब अतिरिक्त सप्लाई है और दिल्ली उसे अनलोड नहीं कर पा रहा. अगर हम दिल्ली को ज्यादा सप्लाई देते रहेंगे तो दूसरे राज्यों को दिक्कत हो सकती है. सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली की 700 मीट्रिक टन की मांग सही नहीं लगती. इससे दूसरे राज्यों का नुकसान होगा. तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली के अस्पतालों में कुल स्टोरेज की क्षमता 478 मीट्रिक टन के करीब है. दिल्ली के अस्पतालों के पास स्टोरेज टैंक नहीं है.

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने कहा था, दिल्ली के कई अधिकारी ऑक्सीजन वितरण देख रहे हैं. ऑक्सीजन लिफ्ट कर हॉस्पिटल तक पहुंचाना सप्लायर का काम होता है. हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है. ऑक्सीजन वितरण में समय लगता है. उन्होंने यह भी कहा कि जो टैंकर खाली हैं, उन्हें भी केंद्र सरकार नहीं उठा रही है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली के वकील राहुल मेहरा ने केंद्र सरकार की ऑक्सीजन ऑडिट की मांग का भी विरोध किया था.