ममता बनर्जी ने बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर तीसरी बार ली शपथ, जानें अबतक का राजनीतिक कैरियर

पश्चिम बंगाल में टीएमसी द्वारा प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद आज टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राजभवन में ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने बंगाल में हो रही हिंसा को लेकर भी चुप्पी तोड़ी, उन्होंने कहा, “राजनीतिक पार्टियों से अपील, शांति बनाए रखें, बंगाल को अशांति पसंद नहीं… अगर कोई अशांति करता है तो हम कार्रवाई करेंगे।”

ममता बनर्जी ने बंगाल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के खिलाफ जबरदस्त संघर्ष किया और 2011 में बंगाल में 34 साल लंबे कम्युनिस्ट शासन को समाप्त उखाड़ फेंका, एक समय था जब राज्य में वाम दलों की हार अकल्पनीय थी। लेकिन ममता बनर्जी ने अंततः वाम दलों का अस्तित्व मिटाकर ही दम लिया, नतीजतन 2021 विधानसभा चुनाव में वामदलों का खाता तक नहीं खुला।

5 जनवरी 1955 को कोलकाता में जन्‍म लेने वाली ममता केंद्र में दो बार रेल मंत्री रह चुकी हैं. ममता का सक्रिय राजनीतिक सफर 1970 में शुरू हुआ, जब वे कांग्रेस पार्टी की कार्यकर्ता बनीं. 1976 से 1980 तक वे महिला कांग्रेस की महासचिव रहीं. 1984 में ममता ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के वरिष्ठ नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर लोकसभा सीट से हराया।

ममता ने अप्रैल 1996-97 में कांग्रेस पर बंगाल में सीपीएम की कठपुतली होने का आरोप लगाया और 1997 में कांग्रेस से अलग हो गईं. इसके अगले ही साल 1 जनवरी 1998 को उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस बनाई. वह पार्टी की अध्यक्ष बनीं. 1998 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने 8 सीटों पर कब्‍जा किया। और 2011 में टीएमसी बंगाल में सरकार बनानें में सफल रही और अब लगातार तीसरी बार बंगाल में टीएमसी की सरकार बनी.