संयुक्त राष्ट्र में पास हुए इस अहम् प्रस्ताव को इजराइल ने किया ख़ारिज, नेतन्याहू ने UN को सुनाई जमकर खरी-खोटी

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच 12 दिनों तक चला खूनी संघर्ष अब समाप्त हो गया है, 11 दिन तक चले संघर्ष के दौरान कथित उल्लंघनों एवं अपराधों की जांच की जाएगी. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के एक प्रस्ताव पर वोटिंग हुई है. प्रस्ताव पास भी हो गया, परन्तु इजराइल ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद इजरायल विरोधी मानसिकता से ग्रसित है.

संयुक्त राष्ट्र निकाय के जिनेवा स्थित मुख्यालय में गुरुवार को बुलाए गए विशेष सत्र में यह प्रस्ताव पास हुआ है. 24 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाला जबकि नौ ने इसका विरोध किया. भारत समेत 14 देशों ने वोटिंग से खुद को अलग कर लिया। भारत के अलावा फ्रांस, इटली, नेपाल और जापान सहित 13 अन्य देशों ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

इजराइल ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया, यानि भारत ने भी वोटिंग न करके एक तरह से इजराइल का ही साथ दिया। पहले भारत ऐसा नहीं करता था। इजरायल के प्रधान बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा, “आज का शर्मनाक फैसला संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद इजरायल विरोधी मानसिकता से ग्रस्त है, इसका एक और उदाहरण।

नेतन्याहू ने कहा, परिषद जनसंहार करने वाले आतंकवादी संगठन, जिसने जानबूझकर इजरायली नागरिकों को निशाना बनाया और गाजा के लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल किया, उस (हमास) के अपराधों को छिपा दिया गया है.

गौरतलब है कि गाजा में फिलिस्तीनी आतंकी संगठन बच्चों व् महिलाओं की आड़ में छुपकर इजराइल में हमलें करता है, ऐसे में जब इजराइल पलटवार करता है तो कुछ न कुछ सिविलियन्स की जान जाना तय है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र इसे मानवाधिकार का उल्लंघन मानता है, शायद इसीलिए प्रस्ताव पास करके जाँच कराने का निर्णय लिया है.

संयुक्त राष्ट्र के rights प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने गाजा पर हुए हमलों में मारे गए और घायल हुए लोगों के बारे में विशेष चिंता व्यक्त की. उन्होंने यह भी कहा कि हमास की ओर से इस्राइल पर अंधाधुंध रॉकेट दागना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।