असम: हिमंता बिस्व सरमा ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, मियाँ-मुस्लिम से वोट नहीं मांगते हैं सरमा

हिंदूवादी भाजपा नेता हिमंता विस्वा सरमा असम के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं, आज राजभवन में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, कल भाजपा विधायक दल की बैठक में सभी विधायकों ने मुख्यमंत्री के लिये हिमंता के नाम पर मुहर लगाई थी, हिमंता ने आज असम के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, गौरतलब है कि 126 विधानसभा सीटों वाले असम में भाजपा ने 60 सीट जीतकर दोबारा सरकार बनाई। हिमंता ने जलुकबरी विधानसभा सीट से 1 लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की, हिमंता ने छात्र राजनीति से कैरियर की शुरुवात की थी, अब असम के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँच गए हैं.

हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस से 2001 से 2015 तक असम के जलुकबरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे, लेकिन उसके बाद कांग्रेस से उनका मोहभंग हो गया और फिर उन्होंने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया, 2016 असम विधानसभा चुनाव हिमंता ने भाजपा के टिकट पर जलुकबरी से लड़ा और लगभग 85 हजार वोटों से जीत दर्ज की. 2021 में सरमा ने इसी सीट से एक लाख से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की.

हिमंता विस्वा सरमा का जन्म 1 फरवरी 1969 को गुवाहाटी की गांधी बस्ती, उलुबरी में हुआ था, जिले में ही शुरुवाती शिक्षा ग्रहण करने के बाद सरमा ने उच्च शिक्षा के लिए कॉटन कॉलेज, गुवाहाटी में दाखिला लिया। सरमा 1991 से 1992 तक कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव थे। उन्होंने 1990 में अपना स्नातक और 1992 में कॉटन कॉलेज, गुवाहाटी से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया। सरमा ने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, गुवाहाटी से एलएलबी किया और उसके बाद गौहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।

हिमंता विस्वा सरमा की पहचान अब एक हिंदूवादी नेता के रूप में होने लगी है, 2021 असम विधानसभा चुनाव के दौरान सरमा ने कहा था, मिया मुस्लिम हमारे लिए (बीजेपी) वोट नहीं करते हैं। मैं यह बात अनुभव के आधार पर कह रहा हूं, उन्होंने पंचायत और लोकसभा चुनाव में हमें वोट नहीं दिया। बीजेपी को उन सीटों पर वोट नहीं मिलेंगे जो इनके हाथों में हैं, जबकि दूसरी सीटें हमारी हैं। इसके अलावा सरमा ने असम के सभी सरकारी मदरसों को समाप्त कर उन्हें सामान्य स्कूल में तब्दील करा दिया।