किसान आंदोलन में गैंगरेप केस: पुलिस के हाथ लगा पीड़िता का मोबाइल, योगेंद्र यादव ने साधा पुलिस पर निशाना

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में हजारों किसानों द्वारा दिल्ली की कई सीमाओं पर कई महीनों से आंदोलन किया जा रहा है, पश्चिम बंगाल से किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने टीकरी बॉर्डर पर आई एक 25 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म का एक मामला सामने आया है. उस महिला की बाद में कोविड-19 के लक्षणों के कारण बाद में अस्पताल में मौत हो गई थी.

महिला के पिता ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई है. युवती के साथ रेप सहित अन्य धाराओं में 6 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। आरोपित किसान सोशल आर्मी से जुड़े थे। आरोपितों में अनिल मलिक, अनूप सिंह, अंकुश सांगवान, जगदीश बराड़, कविता आर्य और योगिता सुहाग शामिल हैं। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने इस मामलें की जाँच शुरू कर दी है.

वहीं पीड़िता का मोबाइल फोन भी पुलिस तक पहुंच गया है. पुलिस अब पीड़िता के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच करवाएगी. उम्मीद है कि पीड़िता के मोबाइल फोन से कई राज खुलेंगे, न्यूज़-18 के मुताबिक़, पीड़िता के पिता के जानकार और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े लोगों ने पुलिस को मोबाइल सौंपा।

वहीं सामूहिक दुष्कर्म मामले में खुद पर लग रहे आरोपों को लेकर किसान मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव ने सफाई दी है. साथ ही सरकार, महिला आयोग और पुलिस पर भी निशाना साधा है. यादव ने कहा है कि इस मामले में उनका नाम लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है. योगेंद्र यादव ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि गंभीर आरोप पर भी पहले दिन से चुप रही पुलिस अब अचानक सक्रिय हो गई.

बता दें कि युवती के पिता के हवाले से दैनिक भास्कर ने लिखा था ‘संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव को जानकारी थी कि किसान नेता युवती के साथ गलत कर रहे हैं, हालाँकि 24 अप्रैल से युवती के सम्पर्क में रहे योगेंद्र यादव ने उसकी मौत से पहले या बाद में पुलिस को इस घटनाक्रम की सूचना नहीं दी, अब सवाल यह उठता है कि जब योगेंद्र यादव को घटना के बारें में जानकारी थी तो उन्होंने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी? क्या, योगेंद्र यादव आरोपियों के कुकर्मों को छुपाना चाहते थे इसलिए सूचना नहीं दी।