6 महीनें बाद नेपाल में होंगे चुनाव, चीन के चमचे केपी ओली नही बचा सके अपनी गद्दी

नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने शुक्रवार आधी रात को संसद भंग कर दिया और 12 व् 19 नवंबर को मध्यावधि चुनाव की घोषणा की। दरअसल नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली बहुमत जुटाने में नाकाम रहे, विपक्ष भी बहुमत नहीं हासिल कर पाया, जिसकी वजह से राष्ट्रपति ने संसद भंग कर दी. राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि संसद को भंग कर दिया गया है और मध्यावधि चुनाव की तारीखों की घोषणा नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (7) के अनुसार की गई है.

नेपाल के राजनीतिक संकट ने शुक्रवार को एक नाटकीय मोड़ ले लिया था क्योंकि प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति को सांसदों से समर्थन पत्र सौंपकर नई सरकार के गठन के लिए अलग-अलग दावे किए थे। लेकिन कोई बहुमत हासिल नहीं कर सका.

आपको बता दें कि चीन की चाल में फंसकर केपी ओली फिलहाल भारत से भी सम्बन्ध खराब कर चुके हैं और उधर चीन ने भी पीठ में छूरा घोंप दिया है, जी हाँ! ओली के राज में नेपाल की जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, नेपाल के कई गावों पर चीन ने कब्जा भी कर लिया है. और अब ओली की कुर्सी भी चली गई.

ओली ने चीन के इशारे पर भारत से अपने सम्बन्ध खराब कर लिए जिसका नतीजा अब पूरे नेपाल की जनता को भुगतना पड़ रहा है। भारत और नेपाल को सदियों से मिली-जुली संस्कृति एक करती रही है। दोनों देशों के बीच बेटी-रोटी का रिश्ता इतना गहरा कि कभी लगा ही नहीं कि दो देश हैं। परन्तु हाल के दिनों में नेपाली सरकार ने भारत के साथ संबंधों में खटास पैदा कर दिया है।