रामायण पाठ में भीड़ जुटी तो भड़के गहलोत, सालेह मोहम्मद के अब्बा की अंतिम यात्रा में भीड़ जुटी कोई एक्शन नहीं

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार धर्म और मजहब देखकर कार्यवाही करती है, इसका ताजा उदाहरण एक बार फिर देखने को मिला है, जी हाँ! कोरोना काल में राजस्थान के धौलपुर में रामायण पाठ में भीड़ जुटी तो सीएम अशोक गहलोत भड़क उठे और अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई, वहीँ जैसलमेर में मंत्री सालेह मोहम्मद के अब्बा की अंतिम यात्रा में कोरोना काल के दौरान हजारों की भीड़ जुटी लेकिन गहलोत ने एक शब्द तक नहीं बोला। मतलब हिन्दू कार्यक्रमों में भीड़ जुटती है तो सीएम गहलोत भड़क जाते हैं लेकिन मुस्लिम चाहे जितनी संख्या में एकत्रित हों चूं तक नहीं करते।

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक़, बसेड़ी के पूर्व भाजपा विधायक सुखराम कोली ने हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा करानें के बाद रामायण के अखंड पाठ का आयोजन किया, जिसमें तकरीबन 500-700 लोग जुटे। इस भीड़ को लेकर कांग्रेस नेता व राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस कदर भड़के की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सबके सामने डीएम-एसपी को जमकर लताड़ लगाई।

वहीँ दूसरी ओर राजस्थान सरकार में मंत्री सालेह मोहम्मद के अब्बा गाजी फ़कीर का सोमवार को इंतकाल हो गया था, उनके अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ जुटी कोविड-19 प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री इस भीड़ को लेकर न तो भड़के और न ही किसी अधिकारी को फटकार लगायी। गाजी फ़कीर की अंतिम यात्रा में हजारों की भीड़ तब जुटी जब राज्य में अंतिम संस्कार में सिर्फ 20 लोगों को एकत्रित होनें का आदेश है. गहलोत सरकार के दोहरे रवैये की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है।

बता दें कि राजस्थान में कोरोना वायरस इस समय जमकर कहर बरपा रहा है, राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 5,63,577 हो गई है, जबकि अबतक लगभग 4 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है, रोजाना औसतन लगभग 16 हजार कोरोना केसेज आ रहे हैं।