छत्तीसगढ़: नक्सलियों के चंगुल से रिहा हुए CRPF कमांडो राकेश्वर सिंह, जानिए उन्हें कैसे छुड़ाया गया?

छत्तीसगढ़ के सुकमा-बीजापुर की सीमा पर जूनागढ़ गांव में शनिवार ( 3 अप्रैल, 2021 ) को नक्सलियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबल के 22 जवान शहीद हो गए हैं, वहीँ नौ नक्सली भी ठोंके गए थे, मुठभेड़ के दौरान CRPF कोबरा बटालियन के जवान राकेश्वर सिंह मनहास लापता हो गए थे, नक्सलियों ने एक स्थानीय पत्रकार को फोन करके कहा कि जवान हमारे कब्जे में हैं, हालाँकि अब पांच दिन बाद CRPF कमांडो राकेश्वर सिंह नक्सलियों के कब्जे से रिहा हो गए हैं, CRPF के कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह पिछले पांच दिनों से नक्सलियों के कब्जे में थे, लेकिन अब रिहा हो गए हैं, छत्तीसगढ़ के आईजी ने राकेश्वर सिंह के रिहाई की पुष्टि की है.

CRPF कमांडो राकेश्वर सिंह के नक्सलियों के कब्जे में जाने और वहां से छूटकर आने के पीछे एक लम्बी कहानी बन गई, अब आपको विस्तार से बताते हैं कि वो कैसे नक्सलियों के चंगुल में फंसे और फिर सही सलामत रिहा होकर वापस अपने कैम्प में आये।

दरअसल 3 अप्रैल 2021 को सुकमा-बीजापुर बॉर्डर पर नक्सलियों और सुरक्षाबल की मुठभेड़ के दौरान राकेश्वर के पास गोली खत्म हो गई और वह पहाड़ी के पास छिप गए थे, फायरिंग रुकने के बाद उन्होंने गांव की तरफ रुख किया, लेकिन यहाँ वो धोखे का शिकार हो गए, दरअसल मुठभेड़ से पहले नक्सलियों ने गांव वालों को डरा-धमकाकर भगा दिया था, और खुद गांव पर कब्जा किया था, जवान के गांव में पहुँचते ही नक्सलियों ने पकड़ लिया। उसके बाद बीजापुर के स्थानीय पत्रकार गणेश मिश्रा को फोन कर नक्सलियों ने इसकी जानकारी दी थी।

राकेश्वर सिंह को नक्सलियों के चंगुल से छुड़ाने के लिए मध्यस्थता टीम गठित की गई थी. इसमें पद्मश्री धर्मपाल सैनी, गोंडवाना समाज के अध्यक्ष तेलम बोरैया शामिल थे. इसके अलावा 7 पत्रकार भी थे, गाँव वालों की मौजूदगी में कई घंटों बातचीत के बाद नक्सलियों ने CRPF कमांडो को रिहा किया और एक पत्रकार ने बाइक पर बैठाकर उन्हें उनकी बटालियन में छोड़ा।

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