मुलायम सरकार के संरक्षण में मुख़्तार अंसारी ने 2005 में करवाए थे मऊ में दंगे, पढ़िए पूरी कहानी

दुर्दांत अपराधी मुख्तार अंसारी पंजाब की रोपड़ जेल से उत्तर प्रदेश की बांदा जेल लाया जा रहा है, यूपी पुलिस मुख़्तार को लेकर पंजाब से निकल चुकी है, पंजाब से बांदा की दूरी लगभग 900 किलोमीटर है, यानि तकरीबन 15-16 घंटे की यात्रा होगी, ये मुख़्तार अंसारी वही दुर्दांत अपराधी है जिसनें मुलायम यादव सरकार के संरक्षण में मुख़्तार अंसारी ने 2005 में मऊ में दंगे करवाये थे व् सैकड़ो महिलाओं के साथ नमाजियों नें रेप किया था। उस समय गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ दबाव के बावजूद 150 गाड़ियों के काफिले के साथ जब मऊ पहुंचे तब 3 दिन बाद दंगा रुका था।

मऊ दंगे की कहानी

दशहरे का मौका था, 13 अक्टूबर 2005 की रात मऊ में शुरू हुआ दंगा 7 दिनों तक चला। मुलायम यादव सरकार में माफिया मुख्तार खुली जीप में राइफ़लधारियों संग घूम रहा था। पुलिस तमाशा देख रही थी। मुख्तार पर लोगों को भड़काने और राइफल से दंगे में पहली हत्या करने का आरोप लगा। दंगों की न्यायिक जांच की मांग उठी। लेकिन मुख्यमंत्री मुलायम ने मांग ठुकराते हुए प्रशासनिक जांच बैठाई।

भ्रष्टाचार के कारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुख्य सचिव पद से हटाई गईं करीबी IAS नीरा यादव के नेतृत्व में कमेटी गठित की।आरोप लगा कि दंगों का सच दफन करने के लिए कमेटी ने लचर रिपोर्ट बनाई। जब कल्याण सिंह ने मऊ में हुए खूनी खेल का पूरा वाकया तत्कालीन राज्यपाल टी राजेश्वर को बताया तो उनका दिल दहल उठा। मऊ के दौरे के लिए वह तैयार हुए लेकिन, सरकार के इशारे पर प्रशासन ने राज्यपाल को दौरे के लिए मना कर दिया। कहा कि माहौल ठीक नहीं है, बाद में दौरा करना ठीक रहेगा।

दंगे में मुख्तार के साथ मऊ के पालिका अध्यक्ष अशरफ जमाल की भूमिका भी सामने आई थी। 7 ऐसे मामले थे जिनमें मुख्तार के खिलाफ केस दर्ज हुए थे, लेकिन IAS नीरा यादव को कोई सुबूत नहीं मिले। मुख्तार को क्लीन चिट देने की कोशिश के तहत कहा गया कि वह जिप्सी में घूमकर दंगा शांत करा रहा था।

साभार – पत्रकार नवनीत मिश्रा के ट्विटर से 

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