कांग्रेसी CM गहलोत बोले घूंघट प्रथा बंद होनी चाहिए, लोगों ने कहा- बुर्का कब बंद कराओगे

राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने घूँघट प्रथा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होनें कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए घूंघट प्रथा को बंद करना जरूरी है, गहलोत के इस ट्वीट का जहाँ कुछ लोग समर्थन कर रहे हैं तो वहीँ विरोध करनें वालों की संख्या भी भारी मात्रा में है, लोगों का कहना है कि घूंघट प्रथा पर तो बोल दिया, बुर्का प्रथा पर कब बोलोगे।

सीएम गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि ‘महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण के लिए ये पांच पॉइंट्स आवश्यक हैं:
1. घूंघट प्रथा दूर हो।
2. छुआछूत खत्म हो।
3. सैनेटरी नेपकिन्स के उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़े।
4. महिला शिक्षा को बढ़ावा मिले, गांव-कस्बों तक महिला कॉलेज खुलें।
5. मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आए।

गहलोत के इस ट्वीट के बाद एक ट्विटर यूजर ने लिखा, माननीय CM महोदय, घूंघट से इतनी महिलाएं पिछड़ी रह जाती है पर बुर्के में सशक्तिकरण कुछ ज्यादा ही होता है। यदि हिम्मत है और महिलाओं का सच्चा सशक्तिकरण चाहते हो तो घूंघट और बुरका दोनों ही हटाना चाहिए, ज्ञातव्य रहे कि घूंघट मान मर्यादा का प्रतीक है, न कि पिछड़ेपन का।

एक महिला ट्विटर यूजर ने लिखा, बुर्का प्रथा, छोटी उम्र में लड़की की शादी, जनसंख्या नियंत्रण भी शामिल करिये. वैसे घूंघट किए महिला को परेशानी नहीं तो आपको क्या परेशानी है. जिसे घूंघट करना है करे तो आपका क्या गया वैसे भी घूंघट से उसकी पहचान नहीं छुपती और ना ही घूंघट में कोई आतंकवादी होता है।

एक यूजर ने लिखा, महोदय घूंघट प्रथा के साथ साथ बुर्का प्रथा भी खत्म होनी चाहिए। केवल घूंघट में से महिलाओं को निकाल कर आपको लगता है कि इससे सशक्तिकरण होगा तो फिर बुर्का हटाने पर क्यों नहीं लगता??

आपको बता दें कि दो साल पहले भी गहलोत ने घूंघट प्रथा के खिलाफ बयान दिया था, उन्होंने कहा था कि ‘जब तक घूँघट रहेगा तब तक महिलायें आगे नहीं बढ़ पाएंगी। उन्होंने कहा की घूँघट का जमाना गया। अब महिलाओं को घूँघट का त्याग करना चाहिए। अब महिलाएं पढ़-लिखकर हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर रही हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण हमारे सामने है।