योगी सरकार ने दिया बलिदान को सम्मान, कोठारी बंधुओं के नाम होगी अयोध्या में सड़क, जानिए इनका इतिहास

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है, राम मंदिर के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले कोठारी बंधुओं के बलिदान को सम्मान देते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या में सड़कें उनके नाम करने का फैसला किया है, इसकी घोषणा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने की. 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या में कोठारी बंधुओं की ह्त्या कर दी गई थी, कोठारी बंधू मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे. दोनों भाइयों का नाम राम और शरद कोठारी था, कारसेवा के दौरान दोनों भगवा ध्वज के साथ विवादित ढाँचे के ऊपर चढ़े थे। तब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। और गोलियों से भुनवा दिया गया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन को पश्चिम बंगाल से जोड़ते हुए कोठारी भाइयों के बलिदान को याद करने का आग्रह किया था। सीएम योगी ने कहा, अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के लिए कोठारी भाइयों ने अपना बलिदान दिया। उनका एक ‘स्मारक’ आज भी अयोध्या में है. अब उनके नाम सड़क भी बनेगी और राम मंदिर बनाने का उनका सपना पीएम नरेंद्र मोदी पूरा कर रहे हैं.

22 साल के रामकुमार और 20 साल के शरद कोठारी ने 22 अक्टूबर की रात कोलकाता से ट्रेन पकड़ी। बनारस आकर दोनों भाई रुक गए। सरकार ने गाड़ियॉं रद्द कर दी थी तो वे टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए। यहॉं से सड़क रास्ता भी बंद था। 25 तारीख से कोई 200 किलोमीटर पैदल चल वे 30 अक्टूबर की सुबह अयोध्या पहुॅंचे। 30 अक्टूबर को विवादित जगह पहुॅंचने वाले शरद पहले आदमी थे। विवादित इमारत के गुंबद पर चढ़कर उन्होंने पताका फहराई। इसके बाद दोनों भाई दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान सुरक्षाबलों ने फायरिंग शुरू कर दी, दोनों भाई एक घर में छुप गए, सुरक्षाबल के एक जवान ने शरद कोठारी को घर से बाहर निकालक्र सड़क पर गोली मार दी, छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख रामकुमार भी कूद पड़े। इंस्पेक्टर की गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

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