कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पे चुप रहने वाले फारूक अब्दुल्ला आज रोहिंग्याओं के लिए आंसू बहा रहे हैं

कश्मीर पंडितों पर हुए नृशंस जुल्म पर खामोश रहने वाले जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला अब भारत में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलामानों और बांगलादेशियों के लिए आंसू बहा रहे हैं, मानवता के राग अलाप रहे हैं.

आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों पर कार्यवाही शुरू हो चुकी है, 168 रोहिंग्या मुसलमानों को होल्डिंग सेंटर में भेज दिया गया है. ये सेंटर कठुआ के हीरानगर जेल में बनाया गया है. शनिवार से ही जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जम्मू में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की बायोमिट्रिक जानकारी सहित अन्य विवरण जुटाने का काम शुरू कर दिया है. इसके अलावा उन NGO और मददगारों पर भी कार्यवाही होगी जो इन रोहिंग्याओं को पनाह दे रहे हैं.

रोहिंग्याओं पर हो रही कार्यवाही को फारुख अब्दुल्ला ने गलत बताया है, अब्दुल्ला ने कहा है कि भारत को इस मुद्दे से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का पालन कर उसके मुताबिक ही चलना चाहिए। हमें मानवीय आधार पर इसका पालन करना चाहिए। यानि फारूक अब्दुल्ला चाहते हैं कि रोहिंग्याओं पर कोई कार्यवाही न हो.

आपको बता दें कि यह वही फारूक अब्दुल्ला हैं जो कश्मीरी पंडितों पर हुए नरसंहार पर खामोश थे, मालूम हो की 19 जनवरी 1990 की रात में मस्जिदों से ऐलान हुआ की कश्मीरी पंडित कश्मीर छोड़कर भाग जाएँ। इसके बाद मुस्लिम लोग लगातार कश्मीरी पंडितों की हत्यायें औऱ रेप करने लगे। कहते थे कि पंडितो, यहां से भाग जाओ, पर अपनी औरतों को यहीं छोड़ जाओ। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 60 हजार परिवार कश्मीर छोड़कर भाग गये। उन्हें आस-पास के राज्यों में जगह मिली।

19 जनवरी 1990 को सबसे ज्यादा लोगों ने कश्मीर छोड़ा था। उस दिन लगभग 4 लाख कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर छोड़ा था। लोगों ने रोते विलखते कश्मीर छोड़ा। कई परिवारों की महिलाओं, बहन बेटियों के साथ बलात्कार तक कर दिया गया था। लेकिन इसपर फारूक अब्दुल्ला खामोश रहते है।

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