नए कृषि कानूनों से देश के छोटे और बहुत छोटे किसानों का विकास होगा: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने जोर देकर कहा है कि नए कृषि कानूनों से देश के छोटे और बहुत छोटे किसानों का विकास होगा। संसद के दोनों सदनों के समक्ष राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर धन्‍यवाद प्रस्‍ताव का आज राज्‍यसभा में उत्‍तर देते हुए श्री मोदी ने कहा कि नए कृषि कानूनों का उद्देश्‍य देश के 12 करोड़ छोटे और बहुत छोटे किसानों की आकांक्षाओं को पूरा करना है। केन्‍द्र द्वारा शुरू किए गए अनेक सुधारों और योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एन डी ए सरकार अपने वायदों के अनुसार गरीबों और किसानों को अधिकार संपन्‍न बनाने के लिए वचनबद्ध है।

उन्‍होंने कहा कि 2014 में फसल बीमा योजना का दायरा बढाया गया और किसानों के 90 हजार करोड़ रुपए के बीमा दावे निपटाए गए जिससे छोटे किसानों को बडा फायदा हुआ। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान योजना के अंतर्गत करीब एक लाख 15 हजार करोड़ रुपए सीधे किसानों के खातों में अंतरित किए गए हैं। श्री मोदी ने कहा कि बडे़ और अधिक फायदेमंद बाजारों तक किसानों की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार ने किसान रेल और किसान उडान जैसी योजनाएं शुरू की हैं।

नए कृषि कानूनों को वापस लेने की विपक्ष की मांग की आलोचना करते हुए उन्‍होंने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि इस तरह की बाधाओं से विकास के लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने में कोई मदद नहीं मिलेगी। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर धन्‍यवाद प्रस्‍ताव की समूची चर्चा में विपक्ष के एक भी सदस्‍य ने किसानों के आंदोलन की वजह नहीं बतायी।

श्री मोदी ने कहा कि न केवल एन डी ए सरकार ने बल्कि पूर्व की कई अन्‍य सरकारों ने भी कृषि क्षेत्र में सुधारों की आवश्‍यकता की बात कही है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा कि उन्‍होंने भी कृषि के क्षेत्र में सुधारों की आवश्‍यकता रेखांकित की थी। श्री मोदी ने कहा कि आज विपक्षी पार्टियों ने केवल राजनीतिक लाभ के लिए अपने पहले के रवैये से हट गई हैं और कृषि सुधारों का विरोध कर रही हैं।

उन्‍होंने कहा कि कई राज्‍य सरकारों ने अपने यहां इसी तरह के कृषि सुधार पहले की कर लिए हैं। सहकारी डेयरी क्षेत्र का उदाहरण देते हुए श्री मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में किए गए सुधारों को जबरदस्‍त सफलता मिली है और दुग्‍ध उत्‍पादन करने वाले किसान अपने उत्‍पाद को देश में कहीं भी बेच सकते हैं। प्रधानमंत्री ने किसानों को भी इसी तरह की सुविधा दिए जाने की आवश्‍यकता पर जोर देते हुए उन्‍होंने कहा कि नए क‍ृषि कानून बनाने का उद्देश्‍य यही है। श्री मोदी ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री ने देश में हरित क्रान्ति की योजना लागू की तो उनका भी इसी तरह विरोध हुआ था।

प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि नए कृषि कानूनों पर अमल के बाद न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍यों को खत्‍म नहीं किया जाएगा और कृषि उपज विपणन समितियां भी बनी रहेंगी। उन्‍होंने कहा कि इस साल के बजट में कृषि उपज विपणन समितियों और मंडियों के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री ने छोटे किसानों की मुसीबतों को दूर करने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का भी आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने रचनात्‍मक आलोचना का स्‍वागत किया लेकिन आगाह किया कि प्रगतिशील सुधारों के रास्‍ते में लगातार रोडे अटकाने से किसान लम्‍बे समय से प्रतिक्ष‍ित अधिकारों से वंचित रह जाएंगे।

प्रदर्शनकारी किसानों के साथ कृषि मंत्री की बातचीत के कई दौर का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि सरकार गतिरोध दूर करने और आगे बातचीत को तैयार है। किसानों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन स्‍थल पर बैठे बुजुर्ग किसानों को लेकर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए श्री मोदी ने उनसे घर वापस लौटने का आग्रह किया।