कृषिमंत्री ने एक झटके में राकेश टिकैत को निपटा दिया, स्पष्ट रूप से कहा तुमसे कोई दिक्कत नहीं है

कृषि कानून के विरोध में किसान आंदोलन पंजाब से शुरू हुआ था, पंजाबी किसान नेता बढ़कर बयानबाजी कर रहे थे, लेकिन गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड की आड़ में दिल्ली में हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन कमजोर पड़ गया, कई किसान नेताओं पर हिंसा को उकसाने के आरोप में केस दर्ज हुआ. गिरफ़्तारी के डर से गाजीपुर बॉर्डर पर मीडिया के सामने आंसू बहाकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसान आंदोलन में नई जान फूंक दी., अब गाजीपुर बॉर्डर पर ही किसानों का मजमा लगने लगा है, पंजाबी किसान नेताओं का कम महत्व हो गया है…राकेश टिकैत बड़े किसान नेता के रूप में उभरे हैं फ़िलहाल।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में आज एक झटके में राकेश टिकैत का महत्त्व खत्म कर दिया, उन्होंने बिना नाम लिए कहा आपसे कोई दिक्कत नहीं है, आंदोलन सिर्फ एक राज्य तक सीमित है, यानि पंजाब तक.

राज्यसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद सिंह तोमर ने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर विरोध केवल एक राज्य तक ही सीमित है और किसानों को उकसाया जा रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान तोमर ने कहा, भारत सरकार कानूनों में किसी भी संशोधन के लिए तैयार है इसके मायने ये नहीं लगाए जाने चाहिए कि कृषि कानूनों में कोई गलती है। पूरे एक राज्य में लोग गलतफहमी का शिकार हैं। किसानों को इस बात के लिए बरगलाया गया है कि ये कानून आपकी जमीन ले जाएंगे।

कृषि मंत्री ने कहा कि मैं प्रतिपक्ष का धन्यवाद करना चाहूंगा कि उन्होंने किसान आंदोलन पर चिंता की और आंदोलन के लिए सरकार को जो कोसना आवश्यक था उसमें भी कंजूसी नहीं की और कानूनों को जोर देकर काले कानून कहा। मैं किसान यूनियन से 2 महीने तक पूछता रहा कि कानून में काला क्या है..अब किसानों को जवाब देना चाहिए कि काला क्या है.