डेढ़ साल की थी तो पिता का हो गया निधन, चना बेंचकर करती है पढ़ाई, अब अडानी ने उठाई शिक्षा की जिम्मेदारी

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मां की ममता व पिता का स्नेह बच्चे के विकास का मुख्य आधार होती है, पर यदि छोटी उम्र में ही उनका साया उठ जाए तो बच्चे के पालन-पोषण की राह भी मुश्किल हो जाती है। कुछ ऐसी ही दुख भरी दास्तां है झारखंड के सिमडेगा की रहने वाली छोटी बच्ची पालनी कुमारी की, जी हाँ! पालनी कुमारी जब डेढ़ वर्ष की थी तभी उनके सर से पिता का साया उठ गया, पालनी कुमार पढ़ाई कर सकें इसलिए सड़क किनारे चना बेंचते ही हैं, पढ़कर लिखकर नर्स बनने का सपना है, पालनी कुमारी की मदद का बीड़ा अब उद्योगपति गौतम अडाणी ने उठाया है..

दरअसल एबीपी न्यूज़ के पत्रकार ज्ञानेंद्र तिवारी ने ट्वीट कर पालनी कुमारी की दास्ताँ सुनाई, उसके बाद तुरंत अडानी ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया, उन्होंने कहा, पालनी की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाना मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

पालनी कुमारी इस समय कक्षा 7वीं में पढ़ती हैं, वो जब डेढ़ साल की थीं तो उनके पापा का निधन हो गया। पालनी अब पढ़-लिखकर नर्स बनना चाहती हैं, क्योंकि उसे लगता है नर्स ही लोगों की सेवा करती हैं। पढ़ाई कर सके इसलिए सड़क किनारे चना बेचती है…पालनी की माता जी भी चना बेंचती हैं बस में, पालनी ने कक्षा 6 में 75% से पास हुईं है।

पालनी की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाते हुए उद्योगपति गौतम अडानी ने फौरन उनका डिटेल्स मांगा, डिटेल्स मिल भी गई है और उन्होंने अडानी फाउंडेशन को सूचित कर दिया है कि वह पालनी कुमारी से सम्पर्क करें। अडानी ने लिखा, छोटी सी बच्ची और इतने बड़े विचार..! पालनी की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाना मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी। अगर आपमें से किसी के पास उसके परिवार की कांटैक्ट डिटेल हो तो मुझे देने की कृपा करें। यही बेटियाँ नए और सशक्त भारत की उम्मीद हैं, इन्हें बेहतर कल मिले ये हम सबकी जिम्मेदारी है।

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