सिर्फ पंजाब तक सिमट कर रह गया किसान आंदोलन, गुजरात में नहीं दिखा कोई असर

हाल ही में पंजाब में निकाय चुनाव् हुए थे, जिसमें भाजपा की करारी हार हुई थी और सत्तारूढ़ कांग्रेस की प्रचंड जीत हुई थी, कुछ स्वघोषित बुद्धिजीवी पंजाब निकाय चुनाव को किसान आंदोलन से जोड़कर देखने लगे. भाजपा की हार के बाद कहने लगे ये किसान आंदोलन का ही असर है कि भाजपा की करारी हार हुई है, यही नहीं, ये बुद्धिजीवी यहाँ तक कहने लगे कि पंजाब से शुरुवात हो चुकी है, अब भाजपा हर जगह हारेगी, क्योंकि भाजपा से किसान नाराज हैं…हालाँकि इन बुद्धिजीवियों के अरमानों पर बहुत जल्द पानी फिर गया है, गुजरात नगर निगम के चुनावी नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि किसान आंदोलन का असर सिर्फ पंजाब तक ही सिमट कर रह गया है, गुजरात समेत देश के बाकि हिस्सों में कोई विशेष असर नहीं है.

बता दें कि गुजरात नगर-निगम चुनाव की मतगणना जारी है, शुरुवाती रुझान में भाजपा ने सभी छह नगर निगमों अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जामनगर, भावनगर और राजकोट में में बम्पर बढ़त बनाई है, वहीँ पहली बार चुनावी मैदान में उतरी ‘आम आदमी पार्टी’ बुरी हार की ओर आगे बढ़ रही है, कांग्रेस का भी लगभग यही हाल है…यानि यहां किसान आंदोलन का कोई असर नहीं है…वो बुद्धिजीवी आज बिल्कुल सनक नहीं रहे हैं जो कल तक भाजपा के हर जगह से हारने की भविष्यवाणी कर रहे थे.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए कृषि कानून के विरोध में हजारों किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पिछले लगभग ढाई महीनों से आन्दोलन कर रहे हैं, इसमें ज्यादातर पंजाब के किसान हैं, सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच अबतक 11 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है..

एक ओर जहाँ आंदोलनकारी कृषि कानून को काला कानून बताकर रद्द करने की मांग कर रहे हैं तो केंद्र सरकार तीनों नए कानूनों को किसानों के हित में बता रही है, हालाँकि कृषि कानून में काला क्या है, कोई किसान नेता अभी तक नहीं बता पाया है, केंद्रीय कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्य सभा में यह जानकारी दी।

loading...