भारतीय किसानों ने आंदोलन करके दुनिया के सामने धोया गरीब, मजबूर, कमजोर और बदहाल होने का दाग

अब तक भारत के किसान दुनिया की आंखों के सामने गरीब, मजबूर, कमजोर और बदहाल थे, दुनिया यही सोचती थी कि भारत के किसान गरीबी, मजबूरी में जी रहे हैं और उनकी कोई वैल्यू नहीं है, लेकिन भारतीय किसानों ने करीब ढाई महीनों से आंदोलन करके दुनिया के सामने गरीब, मजबूर, कमजोर और बदहाल होने का दाग धो दिया है और खुद को ताकतवर साबित कर दिया है।

अब तक दुनिया के सामने यह संदेश जाता था कि वर्तमान व्यवस्था से भारतीय किसान संतुष्ट नहीं है, लेकिन भारतीय किसानों ने आंदोलन करके दुनिया को यह संदेश दिया है कि हम वर्तमान व्यवस्था से ही संतुष्ट हैं और कृषि कानूनों में कोई भी बदलाव नहीं चाहते।

किसान अपनी बात साबित करने के लिए करीब ढाई महीनों से दिल्ली और एनसीआर के कई स्थानों पर आंदोलन कर रहे हैं और उनका समर्थन पूरी दुनिया में किया जा रहा है। एक तरह से पूरी दुनिया भी यही कह रही है कि भारतीय किसान भारत सरकार की वर्तमान खरीद व्यवस्था से खुश हैं और सरकार को इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं करना चाहिए और ना ही किसानों की चिंता करनी चाहिए।

अब तक यह कहा जाता था कि वर्तमान व्यवस्था की वजह से किसान कर्ज में डूबे हैं और आत्महत्या करते हैं, अब तक यह कहा जाता था कि मंडी व्यवस्था से किसान खुश नहीं है और उन्हें मंडियों में बहुत प्रताड़ित किया जाता है, लेकिन किसानों ने आंदोलन करके यह साबित कर दिया है कि वह वर्तमान मंडी व्यवस्था से खुश हैं और मंडी में ही अपनी फसल बेचना चाहते हैं और अन्य कोई विकल्प नहीं चाहते।

भारत सरकार का कहना है कि किसानों के सामने फसल बेचने के कई विकल्प होने चाहिए ताकि जहां पर उनकी फसलों का अच्छा दाम मिले वहां पर वे फसल भेज सके लेकिन, भारतीय किसान यह संदेश दे रहे हैं कि उन्हें कोई और व्यवस्था नहीं चाहिए उन्हें सिर्फ सरकारी मंडियों में खरीद की व्यवस्था ही चाहिए और वह सिर्फ सरकारी मंडियों में ही अपनी फसलों को बेचना चाहते हैं।

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