ये जो सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाई है, ये सरकारी समिति है, हम इसे कतई नहीं मानेंगे: योगेंद्र यादव

कृषि कानून और किसान आंदोलन सम्बंधित सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानून को लागू करने पर रोक लगा दी और 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई कमेटी पर योगेंद्र यादव ने एतराज जताया है, उन्होंने कहा कि ये सरकारी समिति है, हम इसको नहीं मानेंगे।

योगेंद्र यादव ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही एक बयान जारी किया है कि हम इस कमेटी की प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे। ऐसी कोई याचिका कोर्ट से नहीं की गई है, जिसमें कोई कमेटी बनाने को कहा गया हो. योगेंद्र यादव ने कहा कि कमेटी के नाम जारी होने के साथ हमारी आशंका स्पष्ट हो गई है. इनमें से तीन सदस्य कृषि कानूनों के मुखर पैरोकार हैं. यह सरकारी समिति है.

यादव ने कहा, कृषि कानून पर अस्थायी रोक लगाई है, जो कभी भी उठाई जा सकती है. इसके आधार पर आंदोलन खत्म नहीं किया जा सकता. समिति में शामिल अशोक गुलाटी ही कृषि कानूनों को लाने में अहम भूमिका रही है. ये सभी लोग किसान विरोधी कानूनों के समर्थन में है. ये चारों आंदोलन से कोई संबंध नहीं रखते. सरकार और सुप्रीम कोर्ट इस कमेटी से बात करना चाहें तो कर लें, लेकिन आंदोलित किसान उनसे बात नहीं करेंगे।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि क्या कृषि-विरोधी क़ानूनों का लिखित समर्थन करने वाले व्यक्तियों से न्याय की उम्मीद की जा सकती है? ये संघर्ष किसान-मज़दूर विरोधी क़ानूनों के ख़त्म होने तक जारी रहेगा। जय जवान, जय किसान!

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जो चार सदस्यीय कमेटी गठित की है,उसमें भूपिंदर सिंह मान (अध्यक्ष बेकीयू), डॉ प्रमोद कुमार जोशी (अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान), अशोक गुलाटी (कृषि अर्थशास्त्री) और अनिल घनवट (शिवकेरी संगठन, महाराष्ट्र) शामिल हैं। जबतक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आती है तबतक कृषि कानूनों के अमल पर रोक जारी रहेगी।

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