सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से डर क्यों रहे हैं किसान नेता, ये है सबसे बड़ा कारण

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों के कुछ किसान दिल्ली बॉर्डर पर लगभग 45 दिन से आंदोलन कर रहे हैं, सरकार और किसानों के बीच अबतक आठ दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका, अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँच गया है, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार ( 12 जनवरी, 2021 ) को तीनों कृषि कानूनों के अमल पर स्टे लगा दिया और चार सदस्यों की एक कमेटी गठित कर दी.

सर्वोच्च अदालत द्वारा गठित कमेटी तीनों कृषि कानूनों को विस्‍तार से परखेगी, कमिटी यह देखेगी कि कौन से प्रावधान किसानों के हित में हैं, कौन नहीं हैं, दो महीने में कमिटी की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी। ये कमेटी सरकार और किसानों से बातचीत करेगी, हालाँकि किसान नेता इस कमिटी को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं.

राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव ने कहा है सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी गठित की है, हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि कमिटी में शामिल सदस्य कृषि कानून के समर्थक हैं, योगेंद्र यादव ने कहा कि डॉ अशोक गुलाटी ही इस नए कृषि कानून के जनक हैं, ध्यान दिला दें कि अशोक गुलाटी भी कमिटी में शामिल हैं, गुलाटी प्रसिद्द कृषि अर्थशाष्त्री हैं. हालाँकि अब गौर करने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने जब गतिरोध ख़त्म करने के लिए कमिटी बना दी तो ये किसान नेता इसे मान क्यों नहीं रहे हैं.

दरअसल कृषि कानून विरोधी किसान नेता अबतक सिर्फ एक रट लगाए थे कि कृषि कानून फौरन रद्द हो, बिल पर बात करने के लिए तैयार ही नहीं थे, लेकिन कमेटी बन जाने से अब ऐसा नहीं होगा। अब कमिटी कानून के एक-एक बिंदु पर बात करेगी। और आंदोलन कर रहे किसान नेताओं को दिखाना होगा कि बिल में कहाँ लिखा है कि MSP/मंडी खत्म हो जाएगी। इसीलिए ये कमिटी से डर रहे हैं, ज्ञात हो कि कृषि कानून विरोधी किसान नेता एक रट लगाए हैं कि नए कृषि कानून से एमएसपी और मंडी ख़त्म हो जाएगी, जबकि सरकार बार-बार आश्वाशन दे रही है कि ऐसा कुछ नहीं होगा।