सुप्रीम कोर्ट के कमेटी बनानें की बात से बुरी तरह फंसे किसान नेता, अब तो..?

कृषि कानून और किसान आंदोलन सम्बंधित दायर सभी याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की, सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस कमेटी बनानें की बात कही, सर्वोच्च अदालत ने कृषि कानूनों को लेकर कमेटी की जरूरत को बताते हुए कहा कि अगर समिति ने सुझाव दिया तो, वह इसके क्रियान्वयन पर रोक लगा देगा। सुप्रीम कोर्ट के कमेटी बनानें की बात से अब किसान नेता बुरी तरह फंस चुके हैं, दरअसल कृषि कानून विरोध किसान नेता अबतक सिर्फ एक रट लगाए थे कि कृषि कानून फौरन रद्द हो, बिल पर बात करने के लिए तैयार ही नहीं थे, लेकिन अब घूम फिर के वही होगा जो सरकार कह रही थी कि एक एक पॉइंट पर चर्चा करो।

अगर किसान अब सरकार के साथ एक-एक बिंदु पर चर्चा नहीं करेंगे तो सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ दिखेंगे और करेंगे तो उन्हें दिखाना होगा कि बिल में कहाँ लिखा है कि MSP/मंडी खत्म हो जाएगी। ज्ञात हो कि कृषि कानून विरोधी किसान नेता एक रट लगाए हैं कि नए कृषि कानून से एमएसपी और मंडी ख़त्म हो जाएगी, जबकि सरकार बार-बार आश्वाशन दे रही है कि ऐसा कुछ नहीं होगा।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने आशंका जताई है कि किसान आंदोलन में किसी भी दिन हिंसा हो सकती है. मालूम हो कि कृषि कानूनों के विरोध में हजारों किसान 45 दिनों से ज्यादा समय से दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं. गतिरोध को खत्म करने के लिए आठ दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कृषि कानूनों के मुद्दे पर कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित हो कि प्रदर्शन में कोई हिंसा या ब्लड बॉथ ना हो. CJI ने कहा कि अगर जाने अनजाने में कुछ भी ग़लत होता है तो इसके लिए सभी ज़िम्मेदार होंगे. किसी भी क्षण छोटी-सी चिंगारी से हिंसा भड़क सकती है।

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