किसानों की इस मांग पर खफा हुआ सुप्रीम कोर्ट, CJI ने कहा- इसमें पक्षपात कहां से आ गया

केंद्र सरकार द्वारा बनाई गए तीन नआए कृषि कानूनों के विरोध में हजारों किसान पिछले लगभग 2 महीनें से दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं, फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाते हुए एक चार सदस्यीय समिति का गठन कर दिया, जो महीनें के अंदर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देगी। हालाँकि समिति में शामिल सदस्यों पर किसान शंका जाहिर कर रहे हैं.

एक किसान संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि नए किसान कानूनों को लेकर प्रदर्शनकारी किसानों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध को हल करने के लिए शीर्ष अदालत द्वारा गठित पैनल से सदस्यों को हटाया जाए।

शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एक हलफनामे में, भारतीय किसान यूनियन, लोकशक्ति ने कहा था, इन व्यक्तियों को सदस्य के रूप में गठित करके न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन होने वाला है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त सदस्य, किसानों को समान मापदंडों पर कैसे सुनेंगे जब उन्होंने पहले से ही इन तीनों कृषि कानून का समर्थन किया हुआ है।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने सुनवाई के दौरान कहा- “हमने समिति में विशेषज्ञों को नियुक्त किया है क्योंकि हम विशेषज्ञ नहीं हैं। आप समिति में किसी पर संदेह कर रहे हैं क्योंकि उसने कृषि कानूनों पर विचार व्यक्त किए हैं?” “वे कृषि क्षेत्र में प्रतिभाशाली दिमाग वाले लोग हैं। आप उनका नाम कैसे मलिन कर सकते हैं?

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर कृषि अर्थशाष्त्री अशोक गुलाटी के नेतृत्व में चार सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें भूपेंद्र सिंह मान, अनिल घनवट प्रमोद जोशी शामिल हैं.

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