खत्म हुई 11वें दौर की बातचीत: कृषि मंत्री तोमर बोले, पवित्रता नष्ट हो जाती है तो निर्णय नहीं होता

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए तीन नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हजारों किसान लगभग 58 दिन से आंदोलन कर रहे हैं. आंदोलनकारी किसानों की मांग है कि कृषि कानून को रद्द किया जाय क्योंकि ये किसान विरोधी है..वहीँ केंद्र सरकार का कहना है कि ये कानून किसानों के हित में है…किसानों और सरकार के बीच हुई नौ दौर की बातचीत में कोई हल न निकलने के बाद आज ( 22 जनवरी, 2021 ) को 11वें दौर की बातचीत हुई.

दिल्ली के विज्ञान भवन में 11वें दौर में लगभग 3 घंटे चली मैराथन बातचीत के बावजूद कोई हल नहीं निकल सका, बातचीत के दौरान किसान कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग पर अड़े रहे, इसलिए कोई नतीजा नहीं निकल सका। केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को कानून के 2 साल तक स्थगित करने का प्रस्ताव दिया लेकिन किसान मानने को तैयार नहीं हुए.

11वें दौर की बातचीत ख़त्म होने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कहा, भारत सरकार PM मोदी जी के नेतृत्व में किसानों और गरीबों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है और रहेगी… विशेष रूप से पंजाब के किसान और कुछ राज्यों के किसान कृषि क़ानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, इस आंदोलन के दौरान लगातार ये कोशिश हुई कि जनता के बीच और किसानों के बीच गलतफहमियां फैलें। इसका फायदा उठाकर कुछ लोग जो हर अच्छे काम का विरोध करने के आदि हो चुके हैं, वे किसानों के कंधे का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर सकें।

कृषि मंत्री ने आगे कहा, भारत सरकार की कोशिश थी कि वो सही रास्ते पर विचार करें जिसके लिए 11 दौर की वार्ता की गई। परन्तु किसान यूनियन क़ानून वापसी पर अड़ी रही। सरकार ने एक के बाद एक प्रस्ताव दिए। परन्तु जब आंदोलन की पवित्रता नष्ट हो जाती है तो निर्णय नहीं होता। वार्ता के दौर में मर्यादाओं का तो पालन हुआ परन्तु किसानों के हक़ में वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो, इस भाव का सदा अभाव था इसलिए वार्ता निर्णय तक नहीं पहुंच सकी। इसका मुझे भी खेद है.