लगता है किसानों का 6 महीनें का राशन खत्म करवा के ही मानेगी मोदी सरकार

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केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए तीन नए कृषि कानून के विरोध में पिछले लगभग 45 दिनों से हजारों किसान दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे थे, शुरुवात में किसानों ने कहा था कि कृषि कानून रद्द होने तक हम वापस नहीं जाएंगे, खाने-पीने की कोई चिंता नहीं है, क्योंकि हम 6 महीनें का राशन साथ लेकर चले हैं, लेकिन अब ऐसा लगता है कि मोदी सरकार किसानों का 6 महीनें का राशन ख़त्म करवा के ही मानेगी।

ज्ञात हो कि आंदोलनकारी किसानों और केंद्र सरकार के बीच अबतक आठ दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है, बातचीत के लिए अगली तारिख फिर मुकर्रर की गई है 15 जनवरी को..लगभग हर दस दिन के अंतराल पर बातचीत होती है लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा है..अपनी मांगों पर अड़े किसानों का कहना है कि जबतक कृषि कानून रद्द नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।

कृषि कानून के विरोध में आंदोलनकारी किसान 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड भी निकालेंगे। यानी अभी ये आंदोलन लंबा चलने वाला है, ऐसे में किसान जो राशन पानी का स्टॉक लाये थे, वो भी अब घट रहा है..शुरुवात में किसान आंदोलन में काजू, बादाम पिज्जा का लंगर चल रहा था लेकिन अब सिर्फ साधारण लंगर चल रहा है…किसानों ने सोंचा था कि मोदी सरकार झुक जाएगी और 4-5 दिन में कानून वापस ले लेगी, लेकिन ऐसा हो न सका. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर स्पष्ट कर चुके हैं कि कृषि कानून रद्द नहीं होगा, किसान चाहें तो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि अब कानून के समर्थन में भी किसान सामने आने लगे हैं.

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