किसान और सरकार के बीच चल रही बातचीत हुई ख़त्म, जानिये क्या निकला नतीजा? अब 15 को होगी बातचीत

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए तीन नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हजारों किसान लगभग 40 दिन से आंदोलन कर रहे हैं. आंदोलनकारी किसानों की मांग है कि कृषि कानून को रद्द किया जाय क्योंकि ये किसान विरोधी है..वहीँ केंद्र सरकार का कहना है कि ये कानून किसानों के हित में है…किसानों और सरकार के बीच हुई 6 दौर की बातचीत में कोई हल न निकलने के बाद आज ( 8 जनवरी, 2021 ) को आठवें दौर की बातचीत हुई.

दिल्ली के विज्ञान भवन में आठवें दौर में लगभग 3 घंटे चली मैराथन बातचीत के बावजूद कोई हल नहीं निकल सका, केंद्र सरकार और किसानों के बीच अब अगली बातचीत 15 जनवरी 2020 को होगी, लोगों की निगाहें इस मीटिंग पर टिकी हैं। सरकार के साथ बातचीत कर बाहर आये एक किसान नेता ने कहा कि सरकार क़ानूनों में संशोधन की बात कर रही है, परन्तु हम क़ानून वापिस लेने के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। यानि एक बार सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि कृषि कानून रद्द नहीं होगा, इससे पहले भी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कह चुके हैं कि कृषि कानून रद्द नहीं होगा चाहे तो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं.

वहीँ आंदोलनकारी किसानों का का कहना है कि जबतक कृषि कानून रद्द नहीं होगा, तबतक आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि सरकार और किसानों के बीच कितनों दिनों तक यह गतिरोध चलता है।

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