आखिर क्यों ‘ट्रैक्टर मार्च’ निकाल रहे हैं किसान, इसके पीछे है बहुत बड़ी प्लानिंग!

image tweeted - @Kisanektamorcha

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए तीनों नए कृषि कानून के विरोध में हजारों किसान दिल्ली बॉर्डर पर लगभग 42 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं…कृषि कानूनों की वापसी की मांग पर अड़े किसानों का आंदोलन अब हर दिन तेज होता जा रहा है. किसान अब आंदोलन में नया-नया प्रयोग कर रहे हैं..इसी के तहत आंदोलनकारी किसानों ने 7 जनवरी 2021 को ‘ट्रैक्टर मार्च’ निकाला, इसका नेतृत्व संयुक्त किसान मोर्चा कर रहा है. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि ट्रैक्टर रैली 26 जनवरी की तैयारी है. अभी तो ये ट्रेलर है.

ज्ञात हो कि इससे पहले आंदोलनकारी किसान भारत बंद और भूख हड़ताल भी कर चुके हैं, अब ‘ट्रैक्टर मार्च’ निकाल रहे हैं, ट्रैक्टर मार्च के पीछे बहुत बड़ी प्लानिंग हैं, जानकारों का मानना है कि ट्रैक्टर आन्दोलन का एक उद्देश्य है कि सरकार किसी तरह लाठीचार्ज कर दे और गोली चला दे। ताकि सहानुभूति बटोरी जा सके…

सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल ने ट्वीट कर कहा कि राजनीति में जब विचारधारा और पैसा दोनों हार जाय तो केवल सहानुभूति हथियार बचता है। यह सहानुभूति बिना सरकार के अत्याचार किये नहीं पायी जा सकती। खैर सरकार के रुख से स्पष्ट है कि वो आंदोलनकारी किसानों पर ऐसा कोई अत्याचार नहीं करेगी।

आन्दोलनकारी किसान प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच अबतक 9 दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है, किसान चाहते हैं कि सरकार कृषि कानून रद्द कर दे, जबकि बातचीत के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर स्पष्ट कर चुके हैं कि कृषि कानून रद्द नहीं होगा, जो इसका विरोध कर रहे हैं वो चाहें तो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं. ..एक बात यह नहीं भूलना चाहिए कि जितने किसान कृषि कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं उससे कहीं ज्यादा किसान कृषि कानून का समर्थन भी कर रहे हैं. अबतक विभिन्न राज्यों के पचासों किसान संगठन केंद्रीय कृषि मंत्री से मिलकर कृषि कानून का समर्थन कर चुके हैं.

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