गणतंत्र दिवस पर अन्नदाताओं के आतंक से सहमी दिल्ली, ट्विटर पर ट्रेंड हुआ #दिल्ली_पुलिस_लट्ठ_बजाओ

आज पूरा देश जब धूमधाम से 72 वां गणतंत्र दिवस मना रहा था तो वहीँ किसानों ने कृषि कानून के विरोध में ट्रैक्टर मार्च निकाला, ये ट्रैक्टर मार्च दो कदम भी नहीं चल पाया कि हिंसात्मक रूप ले लिया, गणतंत्र दिवस पर अन्नदाताओं के आतंक से आज राजधानी दिल्ली सहम गई…हर कोई इन उपद्रवियों पर कार्यवाही की मांग कर रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर इस समय #दिल्ली_पुलिस_लट्ठ_बजाओ टॉप ट्रेंड कर रहा है, इस ट्रेंड के माध्यम से लोग दिल्ली पुलिस से अपील कर रहे हैं कि किसान के वेश में छुपे दंगाइयों, खालिस्तानी आतंकियों का इलाज जरुरी है…जबतक इन्हें कड़ा दंड नहीं मिलेगा, इन्हें समझ ही नहीं आएगा कि ये गलती क्या किये हैं.

दिल्ली में हिंसा इस कदर बढ़ गई कि किसान पुलिस जवान पर हमला करने लगे, हद तो तब हो गई जब किसानों ने जबरन तलवार के दम पर लालकिले पर कब्जा कर लिए और तिरंगे की जगह दूसरा झंडा फहरा दिया, ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि यह सब आखिर कैसे हो गया, क्योंकि किसानों ने साजिश के तहत गणतंत्र दिवस के दिन देश की इज्जत का तमाशा बनाया।

सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि उपद्रवियों की तो चुन-चुनकर गिरफ़्तारी होनी ही चाहिए लेकिन उससे पहले उन किसान नेताओं की गिरफ्तारी होनी चाहिए जो दिल्ली पुलिस से ट्रैक्टर रैली की इजाजत मांगे थे और शांतिरपूर्ण मार्च का आश्वासन दिए थे…जब किसान राजधानी दिल्ली में उपद्रव कर रहे थे तो यह किसान नेता किस बिल में छुप गए थे.

गणतंत्र दिवस के दिन जब किसान राजधानी दिल्ली में उपद्रव मचा रहे थे, तब योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत जैसे लोग गायब थे, आपको बात दें कि जब दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर रैली की इजाजत नहीं दी थी तो योगेंद्र यादव बार-बार कहते थे क्या? किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का हक़ नहीं है, अब जब इजाजत मिल गई और हिंसा भी हुई तो जवाबदेही किसी न किसी तय होगी ही. और योगेंद्र यादव इससे भाग नहीं सकते, साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए।

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