कथित किसान नेता योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत का कोई जनाधार नहीं है, चुनाव में जब्त हो चुकी है जमानत

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए तीन नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हजारों किसान लगभग 45 दिन से आंदोलन कर रहे हैं…किसानों और सरकार के बीच अबतक 8 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है, जिसकी वजह से अब किसान भी इस आंदोलन से दूरी बनाते जा रहे हैं..जी हाँ!

इस किसान आंदोलन में दो कथित किसान नेता बढ़चढ़कर बयानबाजी कर रहे हैं, एक नाम है योगेंद्र यादव और दूसरे का नाम है राकेश टिकैत, हालाँकि इन कथित किसान नेताओं का कोई जनाधार नहीं है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ये दोनों चुनाव लड़ चुके हैं, न सिर्फ बुरी तरह हारे बल्कि जमानत भी जब्त हो चुकी है…इसका जिक्र हम इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि जब भी कोई किसान नेता/किसान संगठन कृषि कानून का समर्थन करते हैं तो ये दोनों कथित किसान कहते हैं कि इनका संगठन छोटा है, कोई जनाधार नहीं है. अब इन दोनों कथित किसान नेताओं से पूछा जाय इनका क्या जनाधार है, अगर जनाधार होता तो चुनाव में जमानत न जब्त होती।

आपको बता दें कि राकेश टिकैत दो बार चुनाव लड़ चुके हैं, 2007 UP विधानसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लाडे थे जबकि 2014 में RLD के टिकट पर अमरोहा लोकसभा से चुनाव लड़े थे, चुनावी मैदान में टिकैत को दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। बात करें योगेंद्र यादव की तो इनका भी यही हाल है.

जानकारी के अनुसार, योगेंद्र यादव हरियाणा की झरिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं और इन्हें मिले केवल 2779 वोट और जमानत जब्त हो गई, अब सोंचना चाहिए कि इनका क्या जनाधार है जो सरकार को रोज-रोज धमकी देते रहते हैं…कथित किसान आंदोलन से पहले योगेंद्र यादव शाहीन बाग़ में हुए कथित आंदोलन में भी शामिल थे, योगेंद्र यादव हर उस आंदोलन में दिख जाएंगे जो मोदी विरोध में हो रहा हो…कुछ दिनों पहले योगेंद्र यादव गिड़गिड़ाकर कह रहे थे कि आंदोलन में दिल्ली के पड़ोसी किसान भी आएं।

loading...