राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव की संपत्ति जब्त कर दिल्ली में हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए

किसान के वेश में छुपे दंगाइयों ने कल गणतंत्र दिवस के दिन राष्ट्रीय पर्व को राष्ट्रीय शर्म बना दिया, किसान आंदोलन की आड़ में तथाकथित किसानों ने कल पूरी दिल्ली में जमकर दंगा फसाद किये किये, पूरा देश जब धूमधाम से 72 वां गणतंत्र दिवस मना रहा था तो वहीँ किसानों ने कृषि कानून के विरोध में ट्रैक्टर मार्च निकाला, ये ट्रक्टर मार्च दो कदम भी नहीं चल पाया कि हिंसात्मक रूप ले लिया, हिंसा इस कदर बढ़ गई किसान पुलिस जवान पर हमला करने लगे, हद तो तब हो गई जब किसानों ने जबरन तलवार के दम पर कब्जा कर लिए और तिरंगे की जगह दूसरा झंडा फहरा दिया, ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि यह सब आखिर कैसे हो गया, क्योंकि किसानों ने गणतंत्र दिवस के दिन देश की इज्जत का तमाशा बनाया।

सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि उपद्रवियों की तो चुन-चुनकर गिरफ़्तारी होनी ही चाहिए लेकिन उससे पहले उन किसान नेताओं की गिरफ्तारी होनी चाहिए जो दिल्ली पुलिस से ट्रैक्टर रैली की इजाजत मांगे थे और शांतिपूर्ण मार्च का आश्वासन दिए थे…जब किसान राजधानी दिल्ली में उपद्रव कर रहे थे तो यह किसान नेता किस बिल में छुप गए थे. इसकी साथ ही सोशल मीडिया पर मांग की जा रही है कि योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत की सम्पत्ति जब्त कर दिल्ली में हुए नुकसान की भरपाई की जाय, क्योंकि ट्रैक्टर रैली के लिए यही दोनों ज्यादा उतावले थे…अब जब हिंसा हुई तो अंजाम भी इन्हीं को भुगतना चाहिए।

गणतंत्र दिवस के दिन जब किसान राजधानी दिल्ली में उपद्रव मचा रहे थे, तब योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत जैसे लोग गायब थे, आपको बात दें कि जब दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर रैली की इजाजत नहीं दी थी तो योगेंद्र यादव बार-बार कहते थे क्या? किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का हक़ नहीं है, अब जब इजाजत मिल गई और हिंसा भी हुई तो जवाबदेही किसी न किसी की तय होगी ही. और योगेंद्र यादव इससे भाग नहीं सकते, साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। क्योंकि इन सब लोगों ने ही ट्रैक्टर रैली में शामिल होने के लिए किसानों को बुलाया था.

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