खुल गई पोल: कृषि मंत्री रहते हुए शरद पवार लागू करवाना चाहते थे यही कृषि कानून, आज कर रहे विरोध!

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए कृषि कानून का कुछ किसान संगठन विरोध विरोध कर रहे हैं और कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं, किसानों की इस मांग का कांग्रेस समेत कुछ राजनैतिक पार्टियां भी समर्थन कर रही हैं. यानि अब इस मसले पर राजनीति भी शुरू हो गई. अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोगों ने किसान आंदोलन को राजनितिक अखाड़ा बना दिया है.

कभी खुद कृषि कानूनों में बड़े सुधार की वकालत करने वाले एनसीपी मुखिया शरद पवार भी अब नए कृषि कानूनों पर केंद्र को नसीहत दे रहे हैं. शरद पवार इस मामले को लेकर 9 दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करेंगे।

शरद पवार वो नेता हैं जिन्होंने कृषि मंत्री रहते हुए कृषि कानूनों में बड़े बदलाव की वकालत की थी. यानि जिस कृषि कानून का आज विरोध कर रहे हैं वही लागू करवाना चाहते थे, इस बाबत शरद पवार ने सन् 2005, 2007, 2010 और 2011 में पत्र भी लिखे थे. वो पत्र सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है।

शरद पवार ने नवंबर 2011 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी लिखा था. इस पत्र में पवार ने लिखा था कि कृषि सुधारों के लिए प्राइवेट सेक्टर की सहभागिता महत्वपूर्ण हो सकती है. शिवराज से भी उन्होंने एपीएमसी एक्ट में बदलाव की वकालत की थी. लेकिन अब एनसीपी प्रमुख शरद पवार का नजरिया बदल गया है.

किसान जिस कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और रद्द करने की मांग कर रहे हैं इसी को लेकर किसान संगठन के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच 5 राउंड की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है, अब छठे राउंड की बातचीत 9 दिसंबर को होगी, उससे पहले किसानों ने 8 दिसंबर, 2020 को भारत बंद बुलाया है, किसानों द्वारा बुलाये गए भारत बंद को कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी समेत कई पार्टियां समर्थन दे रही हैं.